असम राज्य (Assam in Hindi)

 

दोस्तों आज का हामारा ये नया लेख बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होने वाला है; क्योकि आज हम यहां उन सारे बातो को संक्षेप में हिंदी भाषा में बताएँगे जो हमने हामारे अन्य लेखो में अंग्रेजी भाषा में लिखा है।

मई पूर्ण रूप से निश्चित हु की असम से जुड़े ये सारे तथ्य आपके बेहद काम आएगी। तो चलिए बिना देर किए असम के उत्त्पति से इस लेख को आरम्भ करते है।

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असम की उत्पत्ति (Origin of Assam in Hindi)

क्या लगता है आपको असम की उत्त्पति कैसे हुई होगी ? दराचल ये अत्यंत ही रोमांचकर बात है, लेकिन क्या आप जानते है की असम राज्य का पौराणिक नाम ‘प्राकजोटिशपुर’ था। ये उस समय की बात है जब असम भूमि पर 600 सालो तक शासन करने वाले शक्तिशाली ‘आहोमो’ ने प्रवेश नहीं किआ था।

सं 1228 में आहोमो ने दक्षिणी चीन के mong mao प्रदेश से आकर असम भूमि पर प्रवेश किआ। उस समय उन प्रवेशकारी आहोमो का नेतृत्व ले रहे थे mong mao के यूवराज ‘चओलुंग सुकाफा’. जब आहोमो ने असम भूमि पर पहली बार प्रवेश किआ था तब उनसे भी पहले यहाँ और भी अन्य मानव प्रजाति के लोग रहते थे, ये लोग ज्यादातर ‘ऑस्ट्रिक’ प्रजाति के थे।

इतिहास कहते है की अनुप्रवेशकारी आहोम इन स्थानीय लोगो की तुलना में बहुत ही ज्यादा शक्तिशाली और पराक्रमी थे। यहाँ पहले से रह रहे लोगो ने इन अनुप्रवेशकारी लोगो के पराक्रम और शक्ति को देखकर उनको पहली बार ‘अहम’ शब्द से बिभूषित किआ। ‘अहम’ का अर्थ है ‘असमान’.

ये ‘अहम’ शब्द स्थानीय लोगो के दुवारा अनुप्रवेशकारी आहोमो के प्रति सम्मान था, इसके माध्यम वे ये जाताना चाहते थे की “आप हमसे ज्यादा शक्तिशाली और पराक्रमी हो”.

बाद में इसी ‘अहम’ शब्द से ‘असम’ और ब्रिटिशो के आने के बाद ‘Assam’ शब्द का उत्त्पति हुआ। आशा करता हु असम राज्य की उत्त्पति के सम्बन्ध यहां से आपको सामान्यतम तथ्य प्राप्त हुआ होगा।

अब चलिए जानते है असम की असामीज भाषा का जनम और विकाश कैसे हुआ।

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असम की भाषा (Assam ki Bhasha)

जिस तरह असम राज्य की उत्त्पति का एक कहानी है उसी तरह इस राज्य की भाषा ‘असामीज’ की उत्त्पति का भी एक कहानी है। दोस्तों असम भूमि में सबसे पहले ‘ऑस्ट्रिक प्रजाति’ के लोग रहते थे। लकिन बाद में ‘मंगोलियन प्रजाति’ के लोगो ने यहाँ प्रवेश करके ‘ऑस्ट्रिक प्रजाति’ के लोगो के ऊपर अपना दबदबा कायम करना सुरु कर दिआ।

ये 10 वी शताब्दी से भी पहले की बात है। मंगोलियन प्रजाति के लोग यहाँ अपना शासन चला ही रहे थे जब भारतवर्ष के उत्तरी हिस्से से पुनः इंडो-आर्यन लोगो ने यहां प्रवेश किआ तथा मंगोलियन प्रजाति के लोगो को परास्त करके राज्य का पूरा शासन भार अपने हाथ में ले लिआ।

दोस्तों असामीज भाषा की जनम के लिए समय एहि पर एक कदम और लेता है। दराचल बात यह थी की आर्यन लोगो की भाषा और संस्कृति यहाँ के स्थानीय  मंगोलियन और ऑस्ट्रिक लोगो से काफी उन्नत और शक्तिशाली थी और दूसरी ओर आर्यन भाषा को यहाँ राजभाषा का मर्यादा भी प्राप्त हुआ था।

इन्ही कारणवर्ष अति कम समय के भीतर आर्यन भाषा पुरे पौराणिक असम राज्य के लोगो के बिच फैल गया। दोस्तों मई आपको आर्यन भाषा के बारे में तो बोल रहा हु लकिन क्या आपको ज्ञात है की वो भाषा कौन सी थी ?

जी हां वो भाषा ‘संस्कृत’ ही थी। दोस्तों सांस्कृतिक पंडितो के बिच एक कथा बहुत समय से प्रचलित है की कोई भाषा या संस्कृति कितना भी शक्तिशाली क्यों ना हो लकिन समय के साथ साथ वो भी अपना स्वतंत्र परिचय धीरे धीरे खोने लगता है।

सांस्कृतिक पंडितो के एहि बात इस आर्यन भाषा में भी लागु हुई। समय बीतने के साथ साथ आर्य भाषा ने अपना स्वतंत्र परिचय खो दिआ तथा यहाँ के  पौराणिक अनार्यां भाषा, जैसे की मंगोलियन और ऑस्ट्रिक इत्यादि के साथ अपना मेल बना लिआ।

आर्यन और अनार्यां भाषा के इस मिलाप के कारण यहाँ एक नए भाषा का धीरे धीरे विकाश होने लगा, जिसका प्रथम लिखित परिचय देखा गया था ‘चर्यापदों’ में। दोस्तों इस नए भाषिक प्रकार को ही ‘मगधी’ या ‘कामरूपी प्राकृत’ के नाम से जाना जाता है।

और समय के साथ साथ इस ‘मगधी’ या ‘कामरूपी प्राकृत’ से विवर्तित होकर ही असामीज भाषा का विकाश तथा जनम हुआ। आज असम राज्य में जिस असामीज भाषा का व्यबहार किआ जाता है वो हज़ारो सालो हो रही भाषिक विवर्तन का ही फल है।

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असम की राजधानी (Assam ki Rajdhani)

असम राज्य के जो स्थानीय लोग है वो तो जानते है की इस राज्य की राजधानी ‘दिसपुर’ है लकिन उनमे से भी 80 प्रतिशत लोग इसके अंतराल में छिपे इतिहास को नहीं जानते। कुछ लोग जो बाहर से यहाँ भ्रमण हेतु आते है वो तो गुवाहाटी को ही राज्य की राजधानी समझते है।

तो ठीक है, यहाँ हम असम की राजधानी जुड़े कुछ महत्वपूर्ण बातो को जानने की प्रयास करेंगे।

सबसे पहले तो जो जो लोग ये जानते है की दिसपुर ही असम राज्य की राजधानी है वो बिलकुल सही है लकिन जो जो गुवाहाटी को भी असम की राजधानी समझते है वो भी मेरे हिसाब से गलत नहीं है। दराचल बात यह है की दिसपुर गुवाहाटी में आता है, जिसके कारण बहुत लोगो के मनमे ये धारणा आ जाती है की गुवाहाटी ही असम की राजधानी है।

सं 1972 से पहले दिसपुर गुवाहाटी में स्थित एक छोटा सा गाव था। उस समय असम राज्य की राजधानी वर्तमान के मेघालय राज्य की राजधानी शिलॉन्ग में स्थित थी। अर्थात शिलॉन्ग ही असम की राजधानी थी लकिन सं 1972 में राजनैतिक रूप से मेघालय असम से अलग हो गया और साथ साथ शिलॉन्ग भी।

अब बात आयी थी इस राज्य की नए राजधानी बनाने की। पहले ये सोचा जा रहा था की राज्य की राजधानी को शिलॉन्ग से ‘जोरहाट ज़िले’ में ले आया जाये लकिन बाद में बहुत सारे सुबिधा और असुबिधाओ को देख असम नेताओ ने राज्य के राजधानी को गुवाहाटी के ही एक छोटे से गाव ‘दिसपुर’ में प्रतिष्ठा करने का फैसला कर लिआ। इसीलिए तबसे ‘दिसपुर’ ही असम राज्य की राजधानी है।    

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असम में नवजागरण (Assam me Navjagran)

‘जुनाकि युग’ को ही असम राज्य में नवजागरण की समय के रूप जाना जाता है। इस युग को असम राज्य के भाषा और साहित्य का नया युग भी बोला जा सकता है। दराचल जुनाकि ही वो प्रथम असामीज मैगज़ीन थी, जिसके जरिए इस भाषा को पुनः जीबित करने की चेस्टा की गयी थी।

मई पुनः जीबन की बात इसीलिए कर रहा हु क्योकि 1836 में ब्रिटिशो ने अपने प्रशाशनिक सुबिधा हेतु असम से असामीज भाषा हटाकर बंगाली भाषा का व्यबहार करना सुरु कर दिआ था। असम में बंगाली भाषा का प्राधान्य 1873 तक चला। लकिन इस 37 में भी इसने असामीज भाषा के ऊपर बहुत गहरा आघात किआ।

दोस्तों इस ‘जुनाकि युग’ का जनम क्यों हुआ ? कैसे हुआ ? और किसने इसका नेतृत्व लिआ वो जानते है चलिए।

ये तो हम सभी जानते है की 17 वी सदी से अमेरिका और यूरोप में हुए नवजागरण का प्रभाव पुरे दुनिआ में फैल गया था। इस प्रभाव के कारण दुनिआ के राजनैतिक-सामाजिक क्षेत्र में भी बृहद परिवर्तन संघटित हुआ था।  

दुनिआ में हुए इस परिवर्तन ने राजनैतिक क्षेत्र में गणतंत्र और स्वतंत्रता, व्यक्ति की मानसिक क्षेत्र में आधुनिकतावाद और साहित्य में रोमांटिकता का जनम दिआ। साहित्यिक क्षेत्र में आए इस रोमांटिक प्रभाव को स्पस्ट रूप से देखा गया, दुनिआ के कुछ महान लेखक, कविओ के लेख में। उनमे से अन्यतम थे : – Shaily, Gates और Shakespeare.

दोस्तों जिस तरह इस नवजागरण की झोके ने दुनिआ के बिभिन्न हिस्से को छुआ था उसी तरह इसने हामारे भारत देश को भी प्रभावित किआ। भारत में इसके दुवारा सबसे ज्यादा प्रभावित जगह थी कोलकोता। लकिन दोस्तों मई आपको पहले ही बता देना चाहता हु की असम राज्य में इसका सीधा प्रभाव नहीं हुआ था।

ये बात थी 19 वी सदी के आखिरी समय की जब असम के ही बहुत सारे छात्र कोलकोता में अपने उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। उस समय असम में कोई भी उच्च शिक्षा प्रतिष्ठान ना होने के कारण ज्यादातर शिक्षार्थीओ को उच्च शिक्षा के लिए कोलकोता ही जाना पड़ता था।

उन छात्रों में से अन्यतम थे चंद्रकुमार अग्रवाल, लक्ष्मीनाथ बेजबोरुआ, रघुनाथ चौधरी, पद्मनाथ गोहैबोरुआ इत्यादि। कोलकोता में पढ़ रहे इन छात्रों को यूरोप की इस नवजागरण की झोके ने बहुत ही ज्यादा प्रभावित किआ।

जिसके कारण उनके मनमे भी अपने भाषा को बचाने तथा साहित्यिक प्रगति करने की चाहत जागती चली गयी। और इसके परिमाण स्वोरुप ही कोलकोता में शिक्षा ले रहे असामीज छात्रों को एकत्र करवाके चंद्रकुमार अग्रवाल के धनदान के माध्यम से सं 1889 में ‘जुनाकि मैगज़ीन’ का जनम दिआ गया।

असामीज में जुनाकि का मतलब होता है एक प्रकार का किट या पतंगा जो अँधेरे में रोशनी देता है। ‘जुनाकि मैगज़ीन’ ने भी असामीज भाषा-साहित्य के लिए वही काम किआ। असामीज भाषा को मृत्यु से उद्धार करने तथा भारतवर्ष में एक उच्च मान के भाषा बनाने के कारण आज भी असम राज्य के लोग ‘जुनाकि’ को बड़े ही गर्व से याद रखते है।

 

क्या आप जानते है ?: –

1. असम राज्य में रहने वाले ज्यादातर लोगो के रक्त में किसी एक मानव प्रजाति का DNA नहीं है, बल्कि बिभिन्न मानव प्रजातिऔ के DNA पाए जाते है। उनमे से ऑस्ट्रिक, मंगोलियन और नीग्रोइड अन्यतम है।

2. क्या आप जानते है असम भूमि पर 600 सालो तक शासन करने वाले आहोमो ने जब पटकाई पर्वत पार होकर यहाँ प्रवेश किआ था तब उनकी संख्या यहां पहले से रह रहे लोगो की संख्या के मुकाबले बहुत ही कम था। लकिन अपने शक्ति और बुद्धि के कारण उनलोगो ने यहाँ 600 तक शासन किआ।

3. असम में पालन की जाने वाली त्यौहार Me-Dam-Me-Phi को सबसे पहली बार आयोजित किआ था चओलुंग सुकाफा ने। उन्होंने चीन के mong mao से आकर जब पहली बार ब्रह्मपुत्र घाटी में प्रवेश किआ था तभी उन्होंने देवताओ (landon-आहोमो का देवता) के सम्मान के खातिर ये त्यौहार आयोजित किआ।

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