असम की वेशभूषा (Assam Ki Veshbhusa)

 

कोई भी वेशभूषा या पहनावा किसी देश या समाज की संस्कृति को प्रकाशित करने के लिए काफी होता है। असम की वेशभूषा भी इस राज्य की सभ्यता-संस्कृति को प्रकशित करती है।

ये सूर्य की वो किरण है जो सांस्कृतिक अंधेरो में भी उजाला बनके इस राज्य की समाज को प्रज्वलित करती है। इसके बिना असमिआ जाती, संस्कृति को कभी भी पूर्ण नहीं माना जा सकता है।

दोस्तों आज हम इस लेख में असम की वेशभूषा के बारे में ही आलोचना करेंगे। क्या आप जानने के लिए इच्छुक हो ? अगर आप जानने के हेतु इच्छुक हो तो चलिए बिना देर किए इस आलोचना को आरम्भ करते है। 

गमछा: – जिस तरह दिल की धड़कन के बिना मनुस्य जीवित नहीं रह सकता उसी तरह ये गमछा भी असामिआ संस्कृति की दिल की धड़कन स्वोरुप है।

इसको लेके यहाँ के लोग इतना ज्यादा भावुक है की अगर कभी इस आभुषण के ऊपर संकट आति है, तो ये लोग इस संकट को टालने के लिए कुछ भी कर सकते है। ये केबल एक कपड़े का टुकड़ा नहीं बल्कि असम की अनुभूति है तथा जातिगत सम्मान है।   

असम में जब कोई व्यक्ति कुछ अच्छा काम करता है तब उसको इसी आभुषण के दुवारा सम्मानित किआ जाता है। दोस्तों आपको जानने के लिए बता देता हूँ की गमछा एक सर्बजनिन आभुषण है जिसको पुरुष और महिलाये दोनों व्यबहार करती है।

क्या आप जानते है की गमछा केबल असम में ही नहीं बल्कि भारत के अन्य राज्यों में भी व्यबहार किआ जाता है। बिहार, उड़िशा जैसे राज्य के लोग भी गमछा का व्यबहार करते है लकिन असम में इसको जो सम्मान और आदर किआ जाता है वो कही और नहीं किआ जाता।

दूसरी ओर इनके दुवारा व्यबहार किआ गया गमछा असम से काफी अलग दिखता है।

असम की वेशभूषा (Assam Ki Veshbhusa)

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महिलाओ के लिए 

1. चादर: – असम की महिलाओ का ये परंपरागत पहनावा है। चादर एक ऐसा कपडा है जिसको असामीज महिलाये कंधे से लेकर कमर तक पहनती है। ज्यादातर चादर सफ़ेद ही होते है, जिसके पत्तिओ में छोटे छोटे फूल की चित्र बनायी हुई होती है।

आप सभी तो जानते है की आज पूरा भारतीय समाज आधुनिक हो रही है जिसके कारण बिभिन्न संस्कृतिओ का प्रभाव यहाँ पड़ रही है। असम में भी आज ऐसा ही हो रहा है।

आज के समय में यहाँ की महिलाये भी परंपरागत चादर को धीरे धीरे छोड़ रही है तथा इसके बिपरीत साडी, कुर्ता-पजामा इत्यादि पहनने लगी है।   

2. मेखला: – असामीज महिलाये इसको कमर से लेकर पाउ तक पहनती है। मेखला को बिभिन्न रंग और डिजाईन दुवारा बनाया जाता है। कुछ मेखलाये सामान्य कपडे से बनायीं जाती है और कुछ रेशम के कपड़ो के दुवारा बनायीं जाती है। रेशम से बनायी गयी मेखलाओ को इस समाज में काफी मूल्यबान माना जाता है।

3. ब्लौज: – शरीर के छाती अंश में इसको पहना जाता है। हालाकि इसको भारत के हर एक संस्कृति के समाजो में महिलाये इसे पहनती है। 

 

पुरषो के लिए

1. धोती: – धोती असम की पुरषो का मुख्य पहनावा है। इसको दराचल कमर से लेकर टांग के आधी हिस्से तक पहना जाता है। धोती मुख्य रूप से सफ़ेद रंग की होती है।

पहले जमाने में यहाँ के पुरुष केबल धोती ही पहनते थे लकिन आधुनिकीकरण और पश्चिमीकरण के प्रभाव के कारण आज कल के परंपरा धीरे धीरे गायब होती जा रही है। हलाकि आज भी विवाह, धर्म अनुष्ठान इत्यादीओ में असामीज पुरुष धोती पहनते है।  

2. कुर्ता: – ये एक लम्बा कमीज है, जो लम्बे हाथ का होता है और गले से लेकर कमर तक पहना जाता है। ज्यादातर लोगो दुवारा पहना गया कमीज सफ़ेद रंग की होती है।

 

निष्कर्ष

हमने आपको ऊपर असम की जिन वेशभूषाऔ के बारे में बताया वो सभी मुख्य रूप से पहनी जाती है, हालाकि असम में बिभिन्न जाती-जनजाति के लोग बिभिन्न प्रकार की वेशभूषा पहनते है।

आशा करता हूँ की आपको हामारा ये लेख पछन्द आया होगा। आपको कैसा लगा निचे टिप्पणी करके हमें जरूर बताना।

धन्यवाद।

 

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