सिबसागर भ्रमण के ऊपर निबंध (A Visit to Sibsagar Essay in Hindi)

 

दोस्तों कैसे हो आप सब? आशा करता हूँ की आप सभी अच्छे होंगे। मई शिवसागर का ही रहने वाला हूँ ,इसीलिए इस जगह के ऊपर मुझे थोड़ा बहुत knowledge- है और आज इस लेख में उस knowledge को ही आपके साथ शेयर करने वाला हूँ।

आशा करता हूँ की शिवसागर भ्रमण के ऊपर (a visit to sibsagar essay in Hindi) लिखी जाने वाली ये लेख आपको पछन्द आएगी।

A Visit to Sibsagar Essay Hindi

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परिचय (An Introduction to visit sibsagar in Hindi )

सिवसागर एक ऐसी जगह है जहाँ असम राज्य की निम्ब स्थापित की गयी थी या फिर यू कहे तो असम राज्य का भ्रण जिस जगह बिकसित होके पुरे ब्रह्मपुत्र और बराक घाटी में छा गया वो जगह सिवसागर ही थी।

असम इतिहास की पन्ने पन्ने में आपको इस जगह का बिश्लेषण मिलेगा। तो चलिए असम के लिए इतना तात्पर्यपूर्ण इस जगह के बारे में थोड़ा जान लेते है।

दराचल सिवसागर शहर को पहले के समय में रंगपुर (Rangpur) के नाम से जाना जाता था। रंगपुर का अर्थ है आनंद-उल्लास करने की जगह।

आहोमो के राजा असम में विभिन्न समय पर होने वाले त्योहारों का आनंद लेने के लिए इसी नगर पर आते थे, जैसे की बिहू में आयोजित खेल-कूद के लिए।

बहुत लोग आज भी ये गलत धारणा पालके चल रहे है की आज का जो शिवसागर जिल्ला है उस पुरे जिले को एक समय में रंगपुर नाम से जाना जाता था। लकिन ये पूर्ण सत्य नहीं है, सत्य यह है की आज शिवसागर तो एक जिल्ला है लकिन साथ ही में यही पर सिवसागर शहर भी है।

जिसको Sibsagar के नाम से उच्चारण किआ जाता है। (अर्थात sivasagar -जिल्ला ,sibsagar -नगर) इस sibsagar को ही रंगपुर नाम से जाना जाता था।

रंगपुर नगर की स्तापना की थी आहोमो के राजा रूद्र शिंघा (Rudra  Shingha) ने सन 1699 को। उन्हों ने ही रंगघर का निर्माण भी करवाया था।

सूत्रों के मुताबित इस घर को पहले जब निर्माण किआ गया था तब केबल बॉस और लकड़ी का ही इस्तेमाल किआ गया था लकिन बाद में आहोम राजा प्रमत्त सिंघा ने सन 1744 से 1750 की बिच इसको नए रूप देकर बनवाया।

और उसी रूप को आज हम रंग घर के नाम से जानते है। ये सुनने में बड़े ही अजीब लगता है लकिन कहाँ जाता है की आहोमो ने पहले के समय में जितने भी स्मारक बनवाये थे उन सभी में बोरा चावल और हंस की अंडो का ब्यबहार किआ जाता था।

इसी बात से पता चलता है की उनकी कारिकारी दक्षता कितनी निपुण और शुद्ध थी।

आज उन ऐतिहासिक शिह्नों ने 300 साल से भी ज्यादा समय पार कर लिआ है, इन 300 सालो में बहुत सारे प्राकृतिक तथा कृत्रिम बिपदा भी आयी लकिन आज भी Rang Ghar,kareng ghar,Talatal Ghar जैसे इतिहास असम राज्य का गौरव बनके खडे हुए है।

 

सिवसागर में आपको कौन कौन सी जगह भ्रमण करनी चाहिए? (Which place you should visit in Sibsagar?):-

तलातल घर :-तलातल घर दराचल सैनिक उद्देश से बनाया गया था। इसका निर्माण सुरु हुआ सन 1751 को और खत्म हुआ 1769 को।

आहोम राजा राजेस्वर शिंघा के दिनों में बनायीं गयी ये Military Bunker आज भी खड़ा है। हलाकि समय बीतते बीतते इसका कुछ अंश मिटटी में गायब सा हो गया है।

लकिन ये मानना पड़ेगा की ये घर बहुत ही जटिल तरीका व्यबहार करके बनवाया गया था।

कहानी है या सत्य है पता नहीं, लकिन सुनने में मिलता है की ये घर एक समय में इतना ज्यादा जटिल (complex) था  की अगर कोई वहा पे एक बार खो जाये तो दुबारा उसके लिए वहा से निकल पाना असंभव सा हो जाता था। तलातल घर के निचे एक सुरंग है जो करेंग घर तक जाता है (करेंग घर तलातल घर से 16 किलोमीटर अवस्थित है).

 

शिवा मंदिर :- शिव मंदिर को साधारण शब्द में Sivadol के नाम से जाना जाता है। सन 1734 को महाराजा शिव सिंह की पत्नी अम्बिका ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था।

हिन्दुओ के आराध्य देव शिव की आराधना करने के हेतु इस मंदिर का निर्माण करवाया गया था। शिवसागर तालाब के पार में प्रतिष्ठित इस मंदिर के पास ही है विष्णु मंदिर और देवी मंदिर स्थित है।

हर साल शिवरात्रि के अबसर पर भारत के कोने कोने तथा दुनिआ भर से हज़ारो सैलानी इस मंदिर का दर्शन करने हेतु आते है।

 

पानी दिहिंग पक्षी उद्द्यान :- पानी दिहिंग एक पक्षी उद्द्यान है। इसकी स्तापना सन 1996  को हुई थी और सन 1999 को असम सरकार दुवारा इस इलाके को Protected Area  घोसित कर दिआ गया।

दिहिंग नदी के पार में स्थित होने के कारन इस उद्द्यान को पानी दिहिंग नाम दिआ गया है।

हर साल दुनिआ के विभिन्न जगहों से इस जगह पर विभिन्न प्रजाति के पक्षी आते है। सिवसागर ज़िले के ये सुन्दर उद्द्यान पर्यटकों के लिए अन्यतम मुख्य आकर्षण का केंद्र है।

 

सिवसागर झील:- ये झील एक बहुत ही बड़ा मानब निर्मित झील है। इसको सं 1734 में निर्माण करवाया गया था। आहोम राजा शिव सिंघा के पत्नी महारानी अम्बिका ने इस झील का निर्माण करवाया था।

ये  झील पुरे भारत तथा असम के मानब निर्मित झीलो में से एक बड़े झील है।

अगर असम की बात करे तो इस राज्य में ये आकार के मामले में  दूसरे स्तान पे आते है और पहले स्तान पर आते है जोयसागर का झील, जो सिवसागर में ही अवस्थित है।

 

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