बोगिबिल पूल हिंदी में (Bogibeel Bridge in Hindi)

 

असम में आज तक सरकार की तरफ से जितने भी बड़े निर्माण हुए है वो सभी किसी बड़े आंदोलन या फिर गण सत्याग्रह के माध्यम से ही संभव हो पाए है । उन सभी निर्माणों में से एक है असम के बोगिबिल पूल (Bogibeel Bridge in Hindi). जो 80 के दशक में हुए ‘असम आन्दोलन’ और उसके बाद हुए ‘असम समझौते’ का फल है।

दोस्तों क्या आपको ज्ञात है की बोगिबिल पूल भारतबर्ष में आज तक निर्मित हुए सभी रेल-रोड पूलो में से सबसे लम्बा पूल है। ब्रह्मपुत्र नदी के ऊपर निर्मित ये पूल एशिया महादेश की मामले में दूसरे स्थान पर आते है। । इसकी लम्बाई है कुल 4. 94 किलोमीटर

धेमाजी और डिब्रूगरः जिल्ला को एक साथ जुड़ने वाले बोगिबिल पूल का निर्माण सबसे पहले आरम्भ हुआ था सं 2002 को। आप सायद सोच रहे होंगे की लोकसभा में तो इसका Senction 1997 को ही हो गया था, तो फिर इसके निर्माण में इतना समय कैसे हुआ ?

हाँ ये बिलकुल सत्य है की सं 1997 में H.D Deva Gowda के प्रधानमंत्री होते रहने के समय ही इस पूल के निर्माण के लिए लोक सभा में मंजूरी दी गयी; तथा निर्माण की निम्ब भी उन्होंने ही रखी लकिन विशेष करणबर्ष वो निर्माण कार्य जल्द ही आरम्भ ना हो पायी।

सं 2002 में भारत के भूतपुर्ब प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी जी ने बोगिबिल पूल के निर्माण का काम अनुष्ठानिक रूप से आरम्भ किआ।

1997 से 21 साल बाद 2018 को इस ऐतहासिक निर्माण का काम पूर्ण हुआ और इसी साल के 25 दिसंबर को इस इसकी अनुष्ठानिक रूप से उद्घाटन भी की गयी।

इस उद्घाटन का सौभाग्य भारत के वर्तमान के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी को प्राप्त हुआ।

बोगिबिल पूल का महत्व (Benefits of Bogibeel Bridge In Hindi)

बोगिबिल पूल का जो निर्माण है उसके पीछे बहुत सारे अर्थ-सामाजिक तथा सामरिक उद्देश्य छिपे हुए है। बोगिबिल पूल का जो सबसे पहला महत्व है वो (Benefits of Bogibeel Bridge In Hindi) है अर्थ-सामाजिक। कहा जाता है ये पूल उत्तर-पूरबी राज्यों में उद्द्योगीकरण की गति को बढ़ा देगा। विशेष करके असम और अरुणांचल प्रदेश में।

इसका मूल कारन है, ये पूल इन दोनों राज्यों के बिच की भौगोलिक दुरी को काफी कम कर देगा। दूसरी ओर Upper असम और Lower असम की दुरी को कम करके दोनों अंशो की उन्नति में काफी सहायता करेगा।

पहले धेमाजी से डिब्रूगरः आने के लिए बहुत ज्यादा समय लगते थे अब वो समय बोगिबिल के बदौलत इतना ज्यादा नहीं होगा। आपको बता देता हु की असम राज्य के जो Lower अंश है वो Upper असम से काफी पिछड़ा हुआ है। बोगिबिल पूल के निर्माण से ये पिछड़ापन दुरी करने में काफी सहायता होगी।

इन कारणों के वजह से कुछ लोग इसको 21 लम्बे साल की स्वप्न की पूर्ति भी बोल रहे है

दूसरी ओर इसके निर्माण का सामरिक उद्देश्य भी है। बोगिबिल पूल को इतनी मजबूती से बनायीं गयी है की 7 रिख्टर स्केल का भूकंप भी इसका कुछ हानि नहीं कर सकता। यूद्ध के समय पूल के ऊपर ही सीधा यूद्ध बिमान लैंड करवाए जाने की क्षमता से इसको बनाये गए है। प्रतिरक्षाबीदो के अनुसार अगर चीन के बिरुद्ध भबिस्व में कभी योध हुआ तो बोगिबिल पूल उसमे निर्णायक भूमिका लेगा।

यही वो कारन था जिसके वजह से सं 2007 में इसको प्रधानमंत्री माननीय मनमोहन सिंह जी ने इसको राष्ट्रीय प्रकल्प के अधीन किआ।

यही पर आपको एक अति जरूरी बात बता देना चाहता हूँ की बोगिबिल पूल यूरोप महादेश के ‘Orosudu Bridge Project’ की पद्धिति से बनाया गया है। ‘Orosudu Bridge’ यूरोप के दो देश डेनमार्क और स्वीडन को एक साथ जुड़ता है, जिसका निर्माण आरम्भ हुआ था 1995 में और सम्पूर्ण हुआ था सं 2000 में

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बोगिबिल पूल में पिकनिक 2019 (Picnic In Bogibeel Bridge 2019)

2018 के अंतिम दिनों में बोगिबिल पूल का उद्घाटन किआ गया। इसके वजह से ये जगह अब काफी नया है। असम अरुणांचल प्रदेश के बॉर्डर से मात्र 20 किलोमीटर दूर अवस्थित होने कारण दोनों राज्यों से यहा सैलानी 2019 में जरूर भीड़ करेंगे। दूसरी ओर नए साल का उल्लाश और नया जगह का उद्घाटन। तो यहा के लोगो के लिए 2019 में बोगिबिल पूल की पिकनिक (Picnic In Bogibeel Bridge 2019) काफी मजेदार होने वाला है।

 

बोगिबिल पूल को लेकर बितर्क (Controversies on Bogibeel Bridge In Hindi)

उद्घाटन से पहले कुछ दिनों में इसके नामकरण को लेकर काफी बितर्क भी हुए थे। सायद अपने सुना होगा की कुछ लोग बोगिबिल पूल ‘बीरांगना सटी साधनी ‘ नाम देने के लिए जोर लगा रहे थे और वही दूसरी ओर कुछ लोग इसको ‘मिरि जियरी सेतु’, कुछ लोग ‘भिम्बर देओरी सेतु’ और कुछ लोग ‘चालूंग सुकाफा सेतु’ नाम देने के लिए दाबी कर रहे थे।

हालाकि वो मामला अब शांत हो सुका है, क्योकि इसका अभी तक कोई नामकरण नहीं हुआ है। जो पहले इसको ‘बोगिबिल पूल’ नाम से जाना जाता था आज भी वही नाम से जाना जाता है।

 

निष्कर्ष (Conclusion)

ब्रह्मपुत्र नदी के ऊपर आज तक बहुत सारे रेल-रोड पूल निर्मित हुए है। ये चौथा है, जो साथ में सबसे लम्बा भी है। आशा करते है ये पूल भाबिस्व में असम और अन्य उत्तर पूरबी राज्यों के उन्नति में काफी सहायता करेगा।

आप इसके बारे क्या सोचते है हमें टिप्पणी करके जरूर बताना।

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