1857 के बिद्रोह और उसके बाद का असम(The 1857 revolt in Assam and its aftermath)

 

पुरे भारत तथा असम में 1857 के बिद्रोह के बाद (The 1857 revolt in Assam and its aftermath)  ब्रिटिश ईस्ट-इंडिया कंपनी की शासन का अंत हो गया और इसको अपने हाथ में लिआ ब्रिटिश parliament ने।

सन 1858 में ब्रिटेन की महारानी Victoria की घोषणा पत्र के जरिए पुरे भारत में ये ऐलान कर दिआ गया था की अब इस उप-महादीप को ब्रिटैन की ईस्ट-इंडिया कंपनी नहीं चलाएगी बल्कि चलाएगी ब्रिटिश सरकार।

अब 1858 से पुरे देश में ब्रिटिश सरकार का शासन प्रारम्भ हो सुका था। लोग आशा कर रहे थे की परिस्थिति बदलेगी पहले वाला शोसन अब नहीं रहेगा लकिन जो सोचा था वैसा नहीं हुआ,  हुआ वही जो पहले से होता आ रहा था।

ब्रिटिश सरकार ने ईस्ट-कंपनी से भी ज्यादा शोसन निति प्रयोग करना प्रारम्भ किआ। भारत देश के ही अंग राज्य होने के कारण असम को भी उनके इस निति का भार उठाना परा।

1857-के बिद्रोह के कारण उनकी बहुत आर्थिक नुकसान हुई थी जिसको पूरा करने के लिए प्रशासन ने विभिन्न दिशाओ के ऊपर ब्याज लगाना सुरु कर दिआ।

जिस समय प्रशासन ने इतना कठोर निति अपनाया उस समय असम में ऑफिंग की खेती की जाती थी। (जिससे ड्रग्स जैसे मादकद्रब्य बनाये जाते थे) स्थानिअ लोगो के दुवारा की जाने वाली ये खेती सरकार की ब्यबसाईक प्रगति को रुध कर रही थी,

क्योकि सरकार भी ऐसा ही ब्यापार खोलकर पहले से ही बहुत सारा मुनाफा कमा रहे थे।

1861 को ब्रिटिश प्रशासन ने असम में ऑफिंग के खेती बंद करने का फैसला कर लिआ और इसी मकशद से उन्होंने असम के छोटे छोटे किसानो के ऊपर अधिक से अधिक ब्याज लगाना सुरु कर दिआ।

यही बाद में जाके एक चिंगारी बनी जो बाद में नगाओं ज़िले के फुलगुरी इलाके में बिद्रोह के अग्नि जलाई। तो चलिए इस फुलगुरी बिद्रोह (Phulguri Dhewa) के बारे में थोड़ा जान लेते है।

1857 के बिद्रोह के बाद असम में फुलगुरी बिद्रोह (Phulguri revolt aftermath of 1857 revolt in Assam)

जिस बिद्रोह को असम के लोग आज भी गर्ब से याद करते है उसी बिद्रोह को फुलगुरी बिद्रोह या Phulguri Dhewa के नाम से जाना जाता है।

दराचल ये एक किसानो का बिद्रोह था जो ब्रिटिशो के अर्थनैतिक शोषणों के विरुद्ध की जाने वाली असम की प्रथम बिद्रोह मानी जाती है।

बहुत सारे ऐतिहासिक इस घटना को फुलगुरी का रण भी बोलते है।

ये इतिहास दराचल रचित हुई थी ब्यापारिक उद्देश्य को केंद्र करके। असम राज्य के सामन्य किसान पहले से ही ऑफिंग की खेती करते आ रहे थे और वे बाजार  दखल करने में सक्षम भी हो रहे थे लकिन उसी व्यब्साई को ब्रिटिश भी करके अच्छे मुनाफा कमा रहे थे।

राज्ये के छोटे किसानो के दुवारा की जाने वाली ये ब्यापार सरकार के लिए प्रतियोगिता का कारण बनते जा रहे थे।

इसी कारन उन्होंने किसानो रोकने के लिए एक उपाय निकाला जहा सरकार ने उनके भूमि के ऊपर 25-30 प्रतिशत का ब्याज लगाना सुरु कर दिआ ताकि वे ब्यापार से पूरी तरीके से बाहर हो जाये।

सन 1861 के सितम्बर महीना 17 तारीख , नगाओं शहर से करीबन 13 किलोमीटर दूर फुलगुरी इलाके में 15000 किसान एक साथ एकत्रित हुए जिल्ला स्थानिअ अदालत में हरताल करने के लिए।

और सुरु हुआ हरताल लकिन सरकार को उनके प्रयोजन के प्रति कोई भी क़द्र नहीं।

उस समय नगाओं ज़िले के उपायुक्त थे Lt.Harbert.sconce; इस जिल्ला उपयुक्त ने उस समय प्रतिबाद कारिओ के साथ बहुत ही बुरा बर्ताब किआ,सितम्बर महीना अंत हो सुका था और अगस्त महीने का भी 14 दिन बिट सुके थे।

15 अगस्त को अब पहले से भी ज्यादा किसान एकत्रित होने लगे। विशाल जनता के प्रतिबाद को रोकने के लिए Lt.Harbert.sconce ने उनके ही एक उच्च पद प्राप्त अफसर Lt.singer को प्ररेण किआ ,उन्होंने प्रतिबादी किसानो को प्रतिबाद बंद करके घर लौटने को निर्देश दिआ।

लकिन प्रतिबादीओ ने उनके निर्देश को अमान्य करके प्रतिबाद और भी तीब्रतार कर डाला। singer-ने कोई भी उपाय न देखकर सैनिको को लाठी चलाने को आदेश दे दिआ जिससे प्रतिबादीओ का गुच्छा और भी तेज हो गया।

और उन्हों ने Lt .Singer को वही पर पिट पिट के हत्या कर दिआ। ऐतिहासिक ये भी कहते है की किसानो का गुच्छा इतना ज्यादा तेज हो गया था की उन्होंने Lt .Singer-मृत शरीर को किसी नदी में फेक दिआ।

आखिर में उपायुक्त Lt.Harbert.sconce को कोई उपाय नहीं सूझी और उन्होंने निरस्त्र जनता के ऊपर बन्दुक चलाने आदेश दे दिआ।

बन्दुक के आक्रमण के कारन बहुत सारे किसानो की मृत्यु भी हुई और कुछ बुरी तरीके से घायल भी हुए।

जिन जिन नेताओ ने इस बिद्रोह का नतृत्वा लिआ था उनमे से 4 को फांसी दी गयी और कुछ को पूरा जीबन कैद की सजा सुनाई गयी।

 

निष्कर्ष (Conclusion)

ये सत्य है की इस बिद्रोह के जरिए ब्रिटिश के शोषण निति को पूरी तरीके से ख़तम करना सम्भब नहीं हो पाया लकिन इस बात को मान्यता देनी पड़ेगी की असम के लोगो की जाती चेतना को इस नवजागरण ने काफी उछाह प्रदान किआ।  

 

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