शिवसागर (Sivasagar History In Hindi)

 

दोस्तों क्या आपको पता है की शिवसागर ज़िले के इस नाम का दो अर्थ है? शिवसागर के बारे में जानने के लिए आपके मन में कोई कठिनाई ना हो इसके लिए इस लेख के आरम्भ में ही आपको बता देना चाहता हूँ की ये एक जिल्ला है लकिन साथ ही में ये एक नगरी भी है।

दराचल इसका अचल अर्थ ये है की शिवसागर जिल्ला में ही शिवसागर नगरी भी आता है। पहले के समय इस जिल्ला और नगरी की दुरी को जानने में ज्यादा दिक्कत नहीं होती थी।

क्योकि अंग्रेजी भाषा में इसका उच्चारण कुछ इस तरह होती थी: – जिल्ला को जिसके जरिए जाना जाता था वो था Sivasagar शब्द और जिसके जरिए नगरी को जाना जाता था वो था sibsagar शब्द, मजे की बात है ना।

लकिन बाद में नगरी को समझाने के लिए sibsagar शब्द को हटाके Sivasagar कर दिआ गया (हलाकि आज भी कुछ लोग इस शब्द का व्यबहार करते है), जिससे जिल्ला और नगरी दोनों को ही एक ही शब्द से समझाना जरूरी हो गया।

खेर जो भी हो आज इस लेख में जिल्ला तथा नगरी दोनों की कुछ अति महत्वपूर्ण बातो को जानने की कोसिस करेंगे। तो चलिए हमारे लेख के सुषि में आज क्या क्या है जान लेते है : –

1. इतिहास

2. शिवः मंदिर

3. रंग घर

4. कारेंग घर

5. तलातल घर

शिवसागर (Sivasagar History In Hindi)

शिवसागर का इतिहास (Sivasagar History In Hindi)

अगर हम इसकी इतिहास की बात करे तो इस जगह की इतिहास अाहोम साम्राज्य के साथ जुड़ा हुआ है। अाहोम साम्राज्य के समय से इस जगह को रंगपुर के नाम से जाना जाता था। इस रंगपुर नाम का भी बहुत सारे अर्थ है।

दराचल रंगपुर में ‘रंग’ का अर्थ है ‘उच्चब’ और ‘आनंद’ और ‘पुर’ का अर्थ है ‘स्थल’। अर्थात रंगपुर का अर्थ है “आनंद करने का स्थल”

यही वो जगह है जहा अाहोमो के राजा बिविन्न समय पर असम में पालन की जाने वाली उच्छबो का आनंद लेने के लिए आते थे। जैसे की माघ बिहू के समय मल्लयूद्ध, Buffalo fight और बोहाग बिहू के समय बिहू के नाच-गाना इत्यादि देखने को आते थे।

क्या आपको ज्ञात है की सं 1699 से लेकर 1788 तक रंगपुर यानि आज का शिवसागर अाहोम साम्राज्य का राजधानी था ?

इन समयो के बिच 6 शक्तिशाली अाहोम राजाओ ने इस राजधनी से पुरे साम्राज्य को शाशन किआ। इनमे से सबसे पहला जो राजा था वो था Sukhrungphaa यानि Rudra Singha और जो आखरी था वो था Suhitpangphaa यानि Gaurinath Singha.

1699 से लेकर 1788 सं के समय के बिच इस जगह पर बहुत सारे इसिहास रचे गए, जिसके उदहारण है कुछ इस प्रकार के – शिवः मंदिर ,रंग घर ,करेंग घर ,तलातल घर इत्यादि। हलाकि आगे हम इन सबके बारे में बिस्तार से जानेंगे।

 

शिवसागर का शिवः मंदिर (Sivadol)

हिन्दू देवताओ में अन्यतम उच्च स्थान प्राप्त करने वाले भगवान शिव को केंद्र करके शिवसागर में एक मंदिर का निर्माण किआ गया था सं 1734 को, उसी मंदिर को आज शिव मंदिर के नाम से पुरे भारतबर्ष में जाना जाता है।

बहुत लोगो को सायद ये ज्ञात नहीं की ये शिवः मंदिर ही भारतबर्ष में स्थित सबसे ऊचा शिव मंदिर है। इसकी उचाई है लगभग 104 फ़ीट जिसके ऊपर 8 फ़ीट का एक सोने का कलश भी लगा हुआ है।

असम इतिहास के अनुसार इस शिव मंदिर का निर्माण आहोमो के राजा शिवासिंघा की पत्नी Bar Raja Ambika ने करवाई थी।

शिवसागर का रंग घर (Rang Ghar)

रंगपुर नगर के उत्तर-पुर्बी इलाके में स्थित रंग घर एशिया महादेश का सबसे पहला क्रीड़ा मंडप (pavilion) है।

रंग घर ही वो जगह है जहा आहोमो के राजा बिविन्न समय के त्योहारों में अनुस्थित खेल-कूदो का आनंद लेने के लिए आते थे , जैसे की बिहू में।

कहा जाता है की सबसे पहले रंग घर का निर्माण करवाया था Swargadeo Rudra Singha ने लकिन उनका पहला निर्माण केबल बॉस और लकड़ी था।

जिसके कारन बाद में उनके मृत्यु के पश्चात Swargadeo Pramatta Singha इसका पुनर निर्माण करवाया।

उनका निर्माण पहले से भिन्न था, जिसमे उन्होंने बॉस और लकड़ी की जगह इतो (Brick) का व्यबहार करवाया।

Swargadeo Pramatta Singha का वो निर्माण आज भी असम राज्य तथा शिवसागर का गौरव बने खड़ा हुआ है। जिसको आज हम रंग घर के नाम से जानते है।

कारेंग घर (Kareng Ghar)

The Gorgaon Palace नाम से बिख्यात कारेंग घर शिवसागर का एक और अन्यतम ऐश्वर्या है। ये सुन्दर इतिहास मूल नगरी से 15 किलोमीटर दूर नाजिरा नगर के पास अवस्थित Gorgaon नामक जगह पर स्थित है।

असम इतिहास के अनुसार कारेंग घर के निर्माण का मूल उद्देश्य था असम के सैन्य शक्ति को ज्यादा शक्तिशाली करना। इसका जो पहला निर्माण था वो करवाया था Swargadeo Rudra Singha ने सं 1698 को

ये बनावट ज्यादा उच्च दर्जे के ना होने के कारण 1747 में उनके पुत्र तथा नया आहोम राजा Pramatta Singha ने इसको फिर बनवाया, जो की इस बार बनाने में इतो व्यबहार किआ गया था।

ये बात काफी अजीब है क्योकि कारेंग घर बार बार निर्मित होने के कारण इसका आकृति थोड़ा असम्पूर्ण सा रह गया है। Rudra Singha और Pramatta Singha के बाद भी इसका निर्माण और एक बार हुआ सं 1752 को, इसको करवाया था Rajeswar Singha ने।

आज जो कारेंग घर शिवसागर के Gorgaon में स्थित है वो Rajeswar Singha दुवारा करवाया गया आखिरी निर्माण ही है।

 

तलातल घर (Talatal Ghar)

तलातल घर शिवसागर की इतिहास का और एक अन्यतम धरोहर है। मूल नगरी से 4 किलोमीटर दूर अवस्थित इस घर को सैन्य गतिबिधिओ के लिए आहोम युग में बनवाया गया था।

तलातल घर के श्रेय दो राजाओ को जाता है। एक है Rudra Singha और दूसरा है Rajeswar Singha.

Swargadeo Rudra Singha के दिनों में सं 1702 को आहोम साम्राज्य के राजधानी को Gorgaon से रंगपुर लाया गया। इसी कारन नए राजधानी में सैन्य शक्ति को भी ज्यादा शक्तिशाली करना जरूरी हो गया।

अगर आप तलातल घर देखने जाओगे तो आपको वहाँ और कुछ छोटे छोटे घर भी देखने को मिलेंगे, इनमे से गोलाघर अन्यतम है।

कहाँ जाता है की गोलाघर सामरिक अस्त्र-शास्त्र रखने का भंडार था।

इसका निर्माण का तरीका भी बहुत बिचित्र था, असम इतिहास में ये उल्लेख है की तलातल घर के निर्माण में बोरा चावल ,हंस के अंडे व्यबहार किए जाते थे। आप मानो या ना मानो लकिन तलातल घर निचे से दिखौ नदी तक फैला हुआ था, हलाकि दिखौ नदी तक जाने का वो रस्ता आज बंद हो सुका है।

 

निष्कर्ष (Conclusion)

अब आपकी बारी है हमें बताना की आप शिवसागर के इतिहास के बारे में क्या सोचते हो।

हमें निचे हमें टिप्पणी करके आप ज्ञात कर सकते है ।

धन्यवाद।

 

Read Our Another Awesome Post: – TRADITIONAL MUSIC OF ASSAM

0 Comments

Leave a Comment