शिवसागर का शिवडोल (Sivasagar Sivadol)

 

कुछ लोग शिवसागर को मंदिरो की नगरी भी कहते है। लकिन क्यों ? क्योकि इस नगरी में बहुत सारे मंदिर देखने मिलते है। जैसे की जोयसागर मंदिर, श्याम मंदिर, हतिमूरिआ बोर नामघर, बुद्धिस्ट मठ, बिष्णु दोल, देवी दोल, शिव मंदिर या शिवडोल और भी बहुत सारे।

इन बिविन्न धर्म के मंदिर और मठो के बिच जो सर्बज्ञात या सबसे लोकप्रिय है वो है शिवसागर का शिवडोल या फिर शिव मंदिर।

दोस्तों आज का हामारा ये लेख इस विख्यात शिवडोल के ऊपर ही होने वाला है। आशा करता हूँ की आपको ये पचंद आएगा। तो आइये इसके बारे पहले से जानना सुरु करते है।

पुरे भारतबर्ष में स्थित भगवान शिव के सभी मंदिरो में से ये सबसे ऊचा मंदिर है। ये ऐतिहासिक चिह्न सिबसागर नगर के बीचो बिच ही स्थित है, जिसके पास ही शिवसागर का बड़ा तालाब भी स्थित है।

असम इतिहास के अनुसार इस मंदिर का निर्माण करवाया था Bar Raja Ambika ने सं 1734 को।

क्या आप जानते है की Bar Raja Ambika कौन थी ?

Bar Raja Ambika आहोमो के राजा Swargadeo Siba Singha (1714–1744) की पत्नी थी। Bar Raja Ambika ने ही इस शिव: मंदिर का निर्माण करवाया था।

केबल एहि नहीं, इसके अलावा भी शिवसागर का बड़ा तालाब, बिष्णु दोल, देवी दोल इत्यादि भी Ambika ने ही बनवाया।

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शिवडोल का बनावट (The Texture Of Sivadol)

जैसा की हमने आपको ऊपर बताया शिवडोल भारतबर्ष में स्थित सभी शिव मंदिरो में से सबसे ऊचा मंदिर है। इसकी कुल उचाई है 104 फ़ीट और चौड़ाई है 195 फ़ीट। इसमें एक अति महत्वपूर्ण चीज़ है जो ज्यादातर लोग नहीं जानते। वो है मंदिर के ऊपर लगा हुआ कलश।

क्या आप जानते है की वो कलश किस धातु से निर्मित किआ गया है?

वो पूरा का पूरा कलश सोणे से निर्माण किआ गया है और इसकी कुल उचाई है 8 फ़ीट। अब आप सोच सकते है की कितने आग्रह के साथ Shiva Singha की पत्नी अम्बिका ने इसका निर्माण करवाया था।

इन सबके अलावा आप ये भी जान ले की इसके निर्माण में सिखारा पद्धति का व्यबहार किआ गया था (सिखारा पद्धति दराचल एक ऐसा पद्धति है जिसको हिन्दू धर्म के लोग मंदिर बनाने में व्यबहार करते है)

जिन लोगो को ये ज्ञात है वो भी कुछ आचर्य-चकित सा है की कैसे एक मंदिर 250 सालो से भी ज्यादा समय इस तरह टिका रह सकता है ; जिसको बनाने में केबल हंस के अंडे, बोरा चावल का व्यबहार किआ गया था।

हाँ आप बिलकुल ठीक पढ़े, क्योकि शिवडोल को बनाने में इट और पत्थर के साथ हंस के अंडे और बोरा चावल का मिश्रण ही व्यबहार किआ गया था। [आज के जैसे सीमेंट और आधुनिक पद्धिति नहीं]Sivasagar Sivadol

शिवडोल में त्यौहार (Festivals In Sivadol)

हर साल सावन के महीने में पुरे भारत में महाशिवरात्रि  उच्चब पालन किआ जाता है। अगर आप एक भारतीय हो तो ये आपको जानना चाहिए की शिवसागर के शिवडोल में जो शिवरात्रि का त्यौहार पालन किआ जाता है वो भारतबर्ष का सबसे बड़ा शिवरात्रि का त्यौहार होता है।

शिवरात्रि के दिनों में यहा हजारो-लाखो के तादाद में भक्तो की भीड़ उमर पड़ती है। देश के बाहर से भी बिदेशी पर्यटक ये इस त्यौहार का आनंद लेने के लिए आते है।

 

निष्कर्ष (Conclusion)

आशा करता हु की ये छोटा सा लेख आपको पछन्द आया होगा। अब आप हमें बताईये की आपको कैसा लगा ? निचे जरूर टिप्पणी करना अगर आप सोचते है की आपके दोस्तों को भी इस लेख से लाभ हो सकता है तो इसको अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करना।

धन्यवाद।

 

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