रंग घर के ऊपर निबंध (Essay on Rang Ghar in Hindi)

 

दुनिआ की किसी भी देश या राज्य के इतिहास का पता चलता है उस जगह की निर्माण शैलीओ को देखकर। भारतबर्ष के उत्तर पूर्बी हिस्से में स्थित असम राज्य का भी एक ऐसा महान इतिहास है, जो की हमें किताबो में पढ़ने को मिलता है तथा यहाँ के कुछ सुन्दर सुन्दर जगहों में देखने मिलता है।

दोस्तों आज हम इस लेख में ऐसे ही एक निर्माण की बात करेंगे, जो की स्थित है असम राज्य के शिवसागर ज़िल्ले  में।

हाँ आप बिलकुल ठीक समझे, हम रंग घर के ऊपर ही बात कर रहे है। ये इसिहास असम राज्य में ही नहीं बल्कि पुरे एशिया महादेश में एक विशेष महत्व रखता है। हालाकि इसके बारे में हम थोड़ा आगे जानेंगे। तो चलिए इसके जनम से इस छोटे से निबंध का आरम्भ करते है।

Essay on Rang Ghar in Hindi

Related Articles: –

रंग घर के जनम का इतिहास (Rang Ghar’s Birth History)

आज के शिवसागर नगर से तीन किलोमीटर दूर अवस्थित रंग घर का सबसे पहली बार निर्माण हुआ था आहोमो के राजा रूद्र सिंघा (Swargadeo Rudra Singha) के दिनों में। राजा रूद्र सिंघा ही वो व्यक्ति थे जिन्होंने इस इतिहास की निम्ब रखी।

रूद्र सिंघा के समय में ये घर बांस और लकडिओ से बनायीं गयी थी। बांस और लकडिओ से बनी होने के कारण ये स्थायी नहीं हो पायी जिसके वजह से बाद में उनके मृत्यु पश्चात उनके पुत्र प्रमत्त सिंघा (Swargadeo Pramatta Singha) ने इसको फिरसे बनवाया।

असम इतिहास के अनुसार प्रमत्त सिंघा का ये निर्माण सं 1744 से 1750 के बिच हुई। उनका ये निर्माण काफी उच्च दर्जे का था।

इसमें पहले की तरह बांस और लकड़ी का व्यबहार नहीं किआ गया था बल्कि इसके बदले इट और विशेष तरह के चावल (बोरा चावल) और हंस के अंडो का व्यबहार किआ गया था।

आपको जानके खुसी होगी की रंग घर ही असम राज्य का वो निर्माण है जिसको एशिया महादेश का सबसे पहला क्रीड़ा मंडप होने का सम्मान प्राप्त है। इसको ये सम्मान क्यों मिला इसको भी जानते है चलिए।

रंग घर

रंग घर को क्यों एशिया महादेश का सबसे पहला क्रीड़ा मंडप माना जाता है?

आहोम राजा ने इस क्रीड़ा मंडप का निर्माण करवाया था विभिन्न त्यौहार और खुसी के मौके पर उच्चबो का आनंद लेने के लिए।

ये एक दो मंजिला ईमारत है जिसमे असम के प्रधान उछब बिहू के समय आहोम राजा और बिसिष्ट व्यक्तिगण आते थे बिविन्न प्रकार के नाच-गानो और खेल-कूदो का आनंद लेने के लिए। जैसे की मलयूद्ध, भैंसो का यूद्ध, बिहू नाच-गाना इत्यादि

आपके ज्ञातार्थ बता देता हु की रंग घर से पहले एशिया महादेश के किसी भी देश में ऐसा कोई भी क्रीड़ा मंडप नहीं बनाया गया था। ये रंग घर ही था जो सबसे पहले आहोमो ने असम के भूमि पर निर्मित किआ।

क्रीड़ा को उपभोग करने के लिए सबसे पहले बनाये जाने के कारण आज इसको एशिया महादेश का सबसे पहला क्रीड़ा मंडप माना जाता है।

 

रंग घर का वर्तमान अवस्था

आज रंग घर अपना 270 साल पूरा करने जा रहा है। जो असम राज्य के लिए बहुत ही गौरव की बात है। लकिन 21 वी सदी के आरम्भ से यहां होते आ रहे कुछ घटनाओ ने इस ऐतिहासिक चिह्ना के ऊपर बहुत ही बुरा प्रभाव बिस्तार किआ।

जैसे की अगर हम प्राकृतिक घटनाओ के ऊपर नजर डाले तो भूकंप के बारे में बोल सकते है। और अगर मानब निर्मित क्रीड़ाओं की बात करे तो बोल सकते है प्राकृतिक सम्पदा को ढूंढ़ने के लिए व्यबहार की जाने वाली भूकंपीय सर्वेक्षण (Bomb).

देखा गया है की इन कार्यो तथा प्राकृतिक घटनाओ से इस सुन्दर इसिहास के ऊपर बिविन्न समय पर काफी हानि पहुंची है। 2018 की गयी एक हिसाब के मुताबित रंग घर के दीवारों में 35 से भी ज्यादा दरार पड़े है। जिसके लिए भूकंप और भूकंपीय सर्वेक्षण काफी हद तक जिम्मेदार है।

 

निष्कर्ष (Conclusion)

आशा करता हूँ रंग घरके ऊपर लिखी गयी ये छोटा सा निबंध आपके लिए सहायक हुआ होगा।

अगर आप सोचते है की हमारा ये लेख आपके लिए सच्च में सहायक हुआ तो हमें जरूर टिप्पणी करके बताना।

धन्यवाद।

 

Related Article: – शिवसागर का शिवडोल (SIVASAGAR SIVADOL)

0 Comments

Leave a Comment

Follow us

PINTEREST

LINKEDIN

error: Content is protected !!