तलातल घर का इतिहास (Talatal Ghar History In Hindi)

 

आज प्रत्येक देश अपने सुरक्षा के प्रति सदा सतर्क रहता है। अपने सुरक्षा व्यबस्था को ज्यादा शक्तिशाली करने के लिए वे बिविन्न तरीका भी अपनाते है।

पुराने ज़माने में भी राजा-महाराजा अपने राज्य की सुरक्षा व्यबस्था को शक्तिशाली करने के लिए सदा सतर्क रहते थे और बिविन्न तरीका भी अपनाते थे। इन तरीको का एक अन्यतम उदहारण है तलातल घर।

जी हाँ तलातल घर का इतिहास भी इन्ही सुरक्षा के मामलो के साथ जुड़ा हुआ है। क्या आप इस रहस्यमय घरके बारे में जानने को इच्छुक हो।

अगर हाँ तो इस लेख में हम जानेंगे तलातल घर की कहानी के बारे में, जो रचित हुआ था आज से करीब 250 साल पहले। तो चलिए ये इतिहास क्या है ,क्यों रचित हुआ है वो सब जान लेते है।

तलातल घर की कहानी (The Story of Talatal Ghar)

तलातल घर की कहानी कुछ ज्यादा जटिल नहीं है। चलिए अचल में कहानी है क्या जानते है। दराचल 1540 में अाहोम राजा सुकलेंगमुंग दुवारा Gargaon में अाहोम साम्राज्य की राजधानी प्रतिष्ठा की गयी थी।

सुकलेंगमुंग दुवारा प्रतिष्ठित ये राजधानी 162 साल तक Gargaon में ही रही अर्थात सं 1702 तक।

लकिन सं 1702 से अाहोम राज्य पर शाशन करने वाले राजा रूद्र सिंघा ने राजधानी को Gargaon से Rangpur (आज का Sivasagar नगरी) ले जाने का फैसला किआ। सं 1702-03 के बिच साम्राज्य की राजधानी पूरी तरह Gargaon से Rangpur ले आया गया।

अब बात आयी नए राजधानी की सुरक्षा की। पहले जब Gargaon में था तब सुरक्षा की पूरी व्यवस्था थी लकिन अब नए राजधानी बनाने के कारन नए तरीके से सुरक्षा व्यबस्था को दृढ करना जरूरी हो गया। यही वो कारण है जिसके वजह से तलातल घर का निर्माण हुआ।

इसके निर्माण के श्रेय तीन राजाओ को जाता है एक है रूद्र सिंघा और बाकि दो उनके पुत्र Pramatta Singha और Rajeswar Singha. असम इसिहास के अनुसार ये निर्माण Rajeswar Singha के शाशन कालो में ही पूरा हो पाया, जो की था 1751–1769 तक।

अब जानते है तलातल घर किस तरह सुरक्षा व्यवस्था को शक्तिशाली करता था।

दराचल ये एक सैन्य बंकर जैसा घर था; जिसमे बिविन्न प्रकार के हथियार, गुप्त दरवाजे भी शामिल थे। इसके जमीन के निचे का दो रस्ता, एक 3 किलोमीटर और एक 16 किलोमीटर दूर तक फैला हुआ है।

जो तीन किलोमीटर का रस्ता है वो इसके मूल घर से दिखौ नदी तक जाता है और जो दूसरा है वो Gargaon के कारेंग घर (The Gargaon Palace) तक फैला हुआ है।

है ना रोमांच बात। अब सायद आप समझ सके होंगे की ये किस तरह इसको राजा और राज्य के सुरक्षा व्यवस्था को नजर में रखके बनाया गया था।

अगर आप तलातल घर देखने जाओगे तो आपको वहा और भी छोटे बड़े घर देखने मिलेंगे। इनमे गोलघर अन्यतम है। कहा जाता है की गोलघर में अस्त्र-शस्त्र रखे और बनाये जाते थे।

तलातल घर कहाँ स्थित है ? (Where Talatal Ghar Is Situated?)

जैसा की आपको ऊपर बताया तलातल घर शिवसागर नगर के बहुत ही समीप अवस्थित है। अगर आप इस जगह को देखना चाहते है तो ये शिवसागर नगर से सिर्फ 4 किलोमीटर ही दूर होगा

क्या आप जानते है की ये ऐतिहासिक चिह्न आहोमो दुवारा निर्मित किए गए सबसे बड़ा ऐतिहासिक चिह्न है। आज इस जगह के भ्रमण कारिओ को पूरा का पूरा तलातल घर देखना नसीब नहीं होता क्योकि जो जो मंजिल जमीन के निचे बनाई गयी थी वो आज मिट्टी से बंद हो गयी है।

एक समय में तो ये भी कहाँ जाता था की तलातल घर इतना बिचित्र है की कोई अगर यहाँ एक बार भी खो गया ना तो उसके लिए यहाँ से बाहर निकलना असंभव सा हो जाता था।

 

निष्कर्ष (Conclusion)

अब आपकी बारी है हमें बताना की आपको ये लेख तलातल घर का इतिहास’ कैसा लगा। आशा करता हूँ की आपको पचंद आया होगा लकिन अगर कुछ भी कमी यहा रह गयी हो तो आप हमें निच्चे टिप्पणी करके जरूर ज्ञात कीजिएगा।

धन्यवाद।

 

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