कामाख्या मंदिर का रहस्य (kamakhya Mandir Ka Rahasya)

 

कामाख्या मंदिर तो पुरे भारतबर्ष में बिख्यात है। जो नहीं जानते उनमे से भी ज्यादातर लोगो ने इसके बारे में कही न कही तो सुना होगा।लकिन क्या सबको कामाख्या मंदिर का वो अदभुद रहस्य का अर्थ ज्ञात है?  जो इतिहास से भी पहले घटित हुआ था।

अगर ज्ञात है तो बिलकुल अच्छी बात है और अगर ज्ञात नहीं है तो भी कोई बुरी बात नहीं; क्योकि आज हम इस लेख पर कामाख्या मंदिर के उस अद्भुद रहस्य (kamakhya Mandir Ka Rahasya) के बारे में ही बात करने जा रहे है।

तो अगर आप जानना चाहते हो तो हम आपको इस लेख पर आतंरिक स्वागत करते है।

तो चलिए इस इतिहासिक मदिंर के रहस्य को उद्घाटन करते है [Step-By -Step]

 

कामाख्या मंदिर का रहस्य – एक अद्भुद कहानी (Kamakhya Mandir ka Rahasya- ek Adbhud Kahani)

ये मंदिर भारतवर्ष के बिविन्न कोने में स्थित कामाख्या देवी के 51 शक्तिपीठो का एक अन्यतम है। ये माना जाता है की ये शक्तिपीठ इन सारे पीठो में से सबसे ज्यादा शक्तिशाली है।

ये इतिहास से भी परे, भारतीय धर्मग्रंथो में लिखित कथा पर आधारित है। इस कथा के अनुसार असुरो के राजा दक्ष की एक जवान बेटी थी ,जिसकी नाम थी सटी। सटी मन ही मन भगवान शिव से प्रेम करती थी, और ये मान भी सुकि थी की आगे चलके वही उनका पति परमेश्वर बनेंगे।

लकिन यही एक कठिनाई आके सामने खड़ी हुई। सायद आपमें से ज्यादातर लोगो को मालूम होगा की सटी के पिता यानि दक्ष राजा भगवान शिव के घोर सत्रु थे और उनको देवताओ में निम्न स्तर का मान के घृणा भी करते थे। इसीलिए वे किसी भी हाल में ये नहीं चाहते थे की शिव से उनकी बेटी का विवाह हो।

लकिन सटी देवी ने उनके पिता के इच्छा के विरोद्ध जाकर शिव भगवान से विवाह संपन्न किआ। यही पर ये कहानी एक नया मोर लेती है।

एक बार दक्ष राजा ने एक यज्ञ अनुष्ठित किआ था। कहाँ जाता है की उस यज्ञ में सटी और शिव को निमंत्रित नहीं किआ गया था। लकिन फिर भी सटी देवी ने अपने पति से जिद करने के कारण, अनिमंत्रित होकर भी वे दोनों उस यज्ञ पर भाग लेने चले गए।

सटी-शिव को एक साथ देखकर महाराज दक्ष को बहुत ही क्रोध आया। जिसके चलते उन्होंने सटी के साथ साथ भगवान शिव का भी घोर अपमान कर दिआ।

आप जरा खुद सोचिए की उस समय सटी के मन क्या बिता होगा !

सटी देवी ने अपने ऊपर हुए अपमान को तो सह लिआ लकिन अपने पति के ऊपर हुए अपमान को वे सह न सकी। दूसरी ओर अपने जिद के ही वजह से यज्ञ में आने के कारन अपने पति का अपमान हुआ, जिसके लिए उन्होंने खुद को ही दोष दिआ। क्रोध, हताशा और अपने खुद के पिता के दुवारा हुए अपमान के कारण वे काफी टूट गए।

जिसके चलते भरी यज्ञ में उन्होंने खुद के ही देह पर अग्नि संयोग कर के अपना प्राण त्याग दिआ।

सटी देवी की देह त्याग से भगवान् शिव को बहुत ही क्रोध आया जिसके कारन उन्होंने दक्षराज की वध के लिए दो असुरो का सृजन किआ। उन दो असुरो का नाम था रूद्रकाली और भद्रकाली। इन असुरो ने दक्षराज का सिर काटके उसका अंत कर दिआ।

लकिन उसके बाद भी महादेव का क्रोध शांत नहीं हुआ। उन्होंने सटी के देह को अपने कंधे पर लेके पुरे बिस्व में बिनाश का तांडब नृत्य करना प्रारम्भ किआ।

महादेव की इस तांडव नृत्य को देख देवताओ के साथ साथ मानव भी भयभीत होने लगे। जिसके चलते देवताओ ने भगवान् बिष्नु को उपाय निकालने के लिए प्रार्थना किआ।

भगवान् बिष्नु ने भी महादेव की क्रोध को शांत करने के लिए बहुत सारे प्रयत्न किए लकिन वे भी बिफल हुए , बाद में कोई उपाय न देख बिष्नु ने अपनी सुदर्शन चक्र से सटी देवी की देह 51 खंड के बिभक्त कर दिआ

देह का ये 51 खंड भारतवर्ष के बिविन्न जगहों पर जा गिरे। इन 51 खंडो में से एक खंड, जो की सटी देवी की योनी भाग थी, असम राज्य के कामगिरी अर्थात नीलाचल पहाड़ पर जा गिरे।

कामगिरी नामके जगह पर देह का अंश गिरने के कारण इस जगह बाद में जो मंदिर बनायीं गयी उसको कामाख्या मंदिर के नाम से जाना गया।

भारत के बिविन्न कोने में, जहा जहा देह का 51 भाग गिरा था हर जगह सटी देवी की एक मदिर है। लकिन इन सारे शक्तिपीठो में से कामाख्या को ही सबसे ज्यादा शक्तिशाली माणि जाती है।

क्या आपको इस शक्तिपीठ के शक्तिशाली होने का कारण जानने की उच्छुकता है ? दराचल इस शक्तिपीठ की शक्तिशाली होने के पीछे भी एक रहस्य छिपा हुआ है। तो चलिए बिना देर किए इसको भी जानने की कोसिस करते है।

कामाख्या मंदिर की शक्तिशाली होने का रहस्य (Kamakhya Mandir ki Shaktisali Hone ka Rahasya)

हमने आपको ऊपर बताया की आज जिस जगह कामाख्या मंदिर स्थित है उस जगह पर सटी देवी की योनी भाग गिरी थी। इस पीठ को शक्तिशाली मानने का मूल कारन भी यही पर छिपा हुआ है।

दराचल बात यह है की महिला योनी ही जीबन का प्रबेश दुवार और आरम्भ भी होता है। कामाख्या देवी की योनि से ही पुरे सृस्टि का निर्माण हुआ है, और ये देवी ही इस सृस्टि की माता है। इस बात को यहाँ आने वाले भक्तगण मानते है और इसी बात को मानने के कारन इस शक्तिपीठ को सबसे शक्तिशाली माना जाता है।

ये हमारे कहने की बात नहीं है लकिन अगर आप कामाख्या मंदिर दर्शन करोगे तो आपको दिखाई देगा की वहाँ योनी की पूजा की जाती है।

दराचल इस मंदिर के अंदर कोई भी देवी मूर्ति नहीं है, पुजारी लोग अंदर योनी आकृति की एक पत्थर की पूजा करते है। वे लोग ये मानके चलते है की मंदिर के अंदर योनि आकृति के जो पत्थर का अंश है वो कामाख्या देवी की ही योनी भाग है।

कामाख्या मंदिर के अम्बुबासी मेला का रहस्य (Kamakhya Mandir ke Ambubasi Mela ka Rahasya)

सटी देवी की योनि भाग यहाँ पर गिरना ही अम्बुबासी मेला के आयोजन का भी मूल कारण है।

ये सायद आप सभी जानते होंगे की हर महिला को मासिक धर्म पालन करना होता है। लकिन पौराणिक कथाओ के अनुसार कामाख्या देवी को हर साल में एक ही बार इस धर्म का पालन करना होता है।

हर साल के जून महीने में ये देवी अपना स्त्री धर्म पालन करती है। कहा जाता है की इस समय पूरी पृथ्वी अपबित्र हो जाती है; इसीलिए इन दिनों में खेती करना, पेड़ो से फल-सब्जी तोडना, पुरुष-महिला का सम्भोग करना ये सब मना होता है।

देवी के भक्तगण इन दिनों में मंदिर के आस पास भीड़ करते है। इन दिनों में मदिर के पास ही स्थित ब्रह्मपुत्र नदी की पानी भी लाल हो जाती है। लोग ये मानते है की कामाख्या देवी के स्त्री धर्म के कारन ही इस नदी का पानी ऐसे लाल हो जाता है।

फिर तीन दिन बाद जब देवी पुनर स्वभाबिक अवस्था में लौट आते है। तब पूरी पृथ्वी पुनर पबित्र हो जाती है। और इसी दिन को इस मेला का अंत भी माना जाता है।

 

निष्कर्ष (Conclusion)

आशा करता हूँ की ये लेख कामाख्या मंदिर का रहस्य आपके लिए सहायक हुआ होगा।

अगर आप चाहते है की इस लेख में और भी तत्य जोड़े जा सकते है ,तो आप हमें निचे टिप्पणी करके ज्ञात कर सकते है।

धन्यवाद।

 

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