आहोम साम्राज्य का इतिहास (Ahom kingdom history in Hindi)

 

असम राज्य का इतिहास बोलने से हम जिस इतिहास को समझते है उसी इतिहास को आहोम साम्राज्य का इतिहास (Ahom kingdom history in Hindi) बोला जाता है।

दोस्तों क्या आप जानते है की अहोमो ने असम तथा आज के अन्य उत्तर पूर्बी राज्यों के ऊपर 600 सालो तक शासन किआ था?

 

हाँ दोस्तों ये बहुत आशर्य की बात है की संख्या इतना कम होकर भी अहोमो ने इस साम्राज्य के उपर 600 सालो तक कैसे शासन किआ। 

क्या आप जानते है की –

अहोमो का शासन आज तक उत्तर-पूर्बी भारत में की गयी किसी भी अन्य किसी भी शासको के शासनो से अधिक दीर्घकालीन माना जाता है।

दोस्तों क्या आप इस महान साम्राज्य की इतिहास की कहानी जानना चाहते हो ?

अगर हाँ तो आपको इस लेख में हम इस महान इतिहास की कुछ तथ्य प्रदान करने की कोसिस करेंगे। आशा करते है की आपको अच्छा लगेगा। तो चलिए सुरु करते है। 

 

आहोम साम्राज्य की कहानी (Ahom Samrajya ki Kahani)

 

ये कहानी सुरु हुई थी सन 1228 में जब चीन के Mong Mao प्रदेश से एक Tai Prince आकर ब्रह्मपुत्र घाटी पर उपस्थित हुए।

उस Tai Prince को खुनलुंग देवता का संतान माना जाता था। “असम इतिहास” में लिखा है की पृत्वी पर लोगो के समस्याओ को दूर करने के लिए ही Khunlung देवता ने उस Tai Prince को इस भूमि पर भेजा था।

हम यहा जिस Tai Prince की बात कर रहे है उसी का नाम था चालूंग सुकाफा (Chaolung Sukaphaa). 

Chaolung Sukaphaa- को ही अहोम साम्राज्य का प्रथम सम्राट माना जाता है।

उन्होंने ही 1228 को ब्रह्मपुत्र घाटी में इस साम्राज्य का स्थापना किआ था।

सन 1253 में सुकाफा ने उनके राज्य की राजधानी charaideo- के लिए स्थानांतरित किआ। इसीलिए आज Charaideo को अहोम साम्राज्य का प्रथम राजधानी के रूप में माना जाता है।

Chawlung Sukaphaa- पहली बार इस जगह पर आया था Patkai Hills- के रास्ते से।

1214 तक वे चीन के Mong Mao- प्रदेश में ही थे। लकिन सं 1215 को उन्होंने मांग माओ को छोड़ने का फैसला कर लिआ और पटकाई पर्बत माला के रास्ते से असम भूमि पर प्रबेश किआ।

1253 में charaideo-में अपनी राजधानी प्रतिष्ठा करने के बाद वही पर अपना राज्यभार संभाला और सन 1268 को charaideo-में अपनी आखिरी सांसे लीआ।

सुकाफा के मृत्यु के पश्चात उनके पुत्र Suteuphaa- अाहोम राज्य का उत्तराधिकारी बने। सन 1268 से लेकर 1281 तक शासन करने के पश्चात उनकी भी मृत्यु हो गयी।

इसी तरह एक के बाद एक राजाओ ने अाहोम राज्य के ऊपर शासन किआ और ये सिलसिला 1826 तक चला। उसके बाद बर्मीज़ के आक्रमण के कारन दिन व दिन 19 बी सदी के आरम्भ से  अाहोम साम्राज्य दुर्बल होता चला गया।

1826 के Yandabu-संधि के बाद अहोम साम्राज्य का सूर्य पूरी तरह से अस्त हो गया। हलाकि इसके बारे में हम थोड़े बाद में जानेंगे। 

 

आहोम साम्राज्य की निम्ब (Foundation of Ahom  kingdom)

अगर हम अाहोम साम्राज्य की निम्ब की बात करे तो देखा जाता है की इस राज्य पर जिन्होंने शासन किआ था (यानि आहोम शासक) वे  इस जगह पर पहले से ही रहने वाले लोगो के तुलना में काफी शक्तिशाली थे।

जब पहली बार ये शक्तिशाली लोग इस भूमि पर आये थे तब यहा पर रहने वाले लोग उनको “आहोम” नाम से पुकारते थे। “आहोम “शब्द का अर्थ है असमान यानि आहोम लोग यहां पर पहले से ही रहने वाले लोगो के तुलना में काफी शक्तिशाली थे।

और बाद में इस “आहोम “शब्द से ही इस भूमि का भी नाम असम परा।

इस राज्य का शक्तिशाली होना और इतने सदीओ तक खड़ा रहना ये कोई आम बात नहीं है। इसके बहुत सारे कारन है जिनमे से सबसे बड़ा कारन है, यहां के शासको का उदार मनोबृति।

जितने भी अाहोम राजा आये वे कभी भी अन्य जाती ,धर्म ,भाषा के लोगो को अपने धर्म ,भाषा तथा संस्कृति को जबरदस्ती मानने के लिए बाध्य नहीं करवाए।

दूसरी ओर वे अपने खुदके भाषा तथा संस्कृति को छोड़के यहां का परंपरागत संस्कृति को ही ग्रहण किआ जिसके कारन यहां के लोगो का बिस्वास अहोमो के प्रति अधिक मजबूत हो गया।

आहोम राजा Suhungmung- ने तो हिन्दू धर्म  को ही अपना धर्म स्वीकार कर लिआ, इसीलिए उनको पहला अाहोम हिन्दू राजा के नाम से भी जाना जाता है।

 

 

अहोम साम्राज्य का सूर्य अस्त (The Fall of the Ahom Kingdom in Hindi)

 

19 वी सदी के अंत से अहोम साम्राज्य की बिपदा आरम्भ हो गयी थी। इस समय राज्य में अंदरूनी बिद्रोह के कारन राज्य का अर्थ-सामाजिक व्यवस्था काफी दुर्बल हो गया था।

 

जिस बिद्रोह के कारन ये बिपदा आयी थी उस बिद्रोह का नाम था मोअामोरिअा बिद्रोह। इस घटना से यहा के शासन व्यवस्था की रीर की हड्डी टूट गयी। 20 वी सदी के आरम्भ तक ये बिद्रोह अंत हो गया था लकिन अभीभी बिपदा नहीं तली थी।  

 

अब आप पूछेंगे की क्यों ? क्योकि…………..

 

फिर सं आए 1817, जब बर्मीज़ो ने असम पर हमला कर दिआ। पहले से ही होते आ रहे अंदरूनी बिद्रोहो के कारन साम्राज्य काफी दुर्बल हो सुका था जिसके कारन अहोम राजा बर्मीज़ो  मुकाबला करने में असमर्थ थे। इसी कारन राज्य को बर्मीज़ो से उद्धार करने के लिए ब्रिटिशो को निमंत्रित करना पड़ा। 

 

ब्रिटिशो के आने के बाद ब्रिटिश और बर्मीज़ो के बिच असम को लेकर युद्ध 1826 तक चली। 1826 में बर्मीज़ो को पराजित करने के बाद Yandabu संधि के जरिए  ब्रिटिशो ने असम को उद्धार किआ।

 

लकिन सबसे बड़ी समस्या आके अब खड़ी हुई थी क्योकि असम को एक बार उद्धार करने के बाद असम का प्राकृतिक सम्पद देखकर ब्रिटिशो ने यहां पर अपना शासन स्थिर करने की कोसिस किआ और कुछ ही सालो में ब्रिटिश सफल हो गए और पूरा असम शक्तिशाली ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन हो गए। 

 

यही वो कहानी है जिसके जरिए शक्तिशाली अहोम साम्राज्य का पतन हुआ या फिर यो कहे तो अहोम साम्राज्य का सूर्य अस्त हो गया। 

आहोम साम्राज्य के शासको के नाम (Name of the rulers of Ahom Kingdom)

 

Chawlung Sukapha (1228–1268), Suteuphaa (1268–1281), Subinphaa (1281–1293), Sukhaangphaa (1293–1332), Sukhrangpha (1332–1364), Sutuphaa (1369–1376), Sudangphaa (1397–1407), Sujangphaa (1407–1422), Suphakphaa (1422–1439), Susenphaa (1439–1488), Suhenphaa (1488–1493), Supimphaa (1493–1497), Suhungmung (1497–1539), Suklenmung (1539–1552), Sukhaamphaa (1552–1603), Susenghphaa (1603–1641), Suramphaa (1641–1644), Sutingphaa (1644–1648), Sutamla (1648–1663), Supangmung (1663–1670), Sunyatphaa (1670–1672), Suklamphaa (1672–1674), Suhung (1674–1675), Gobar Roja (1675–1675), Sujinphaa (1675–1677), Sudoiphaa (1677–1679), Sulikphaa (1679–1681), Gadadhar Singha (1681–1696), Sukhrungphaa (1696–1714), Sutanphaa (1714–1744), Sunenphaa (1744–1751), Suremphaa (1751–1769), Sunyeophaa (1769–1780), Suhitpangphaa (1780–1795), Suklingphaa (1795–1811), Sudingphaa (1811–1818), Purandar Singha (1818–1819), Sudingphaa (1819–1821), Jogeswar Singha (1821–1822), Purandar Singha (1833–1838)

 

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