असम की संस्कृति (Assam ki Sanskriti)

 

जिस तरह एक सुन्दर फूल या फिर एक सुन्दर झरना उसके पास खड़े व्यक्ति के मन को आनंद प्रदान करता है उसी तरह किसी देश या समाज की संस्कृति भी उस समाज में रहने वाले लोगो के मन को आनंद प्रदान करता है।

चाहे वो समाज और संस्कृति आपका हो या फिर हामार। 

असम की संस्कृति (Assam ki Sanskriti) भी असम में रहने वाले लोगो के लिए एक सुन्दर फूल या झरने से कम नहीं बल्कि यु कहें तो ये संस्कृति इस राज्य के लोगो के लिए दिल का टुकड़ा स्वोरुप है।

किसी समाज की संस्कृति पता चलता है उस समाज में रहने वाले लोगो का अचार व्यबहार ,भाषा (Bhasha) ,खान-पान (Khan -Paan),निर्त्य-गीत (Nritya-Geet), पहनावा (Pehnawa) इत्यादि के माध्यम से। 

इस राज्य के संस्कृति का भी पहचान है इन्ही चरित्रों के माध्यम से ही है। 

क्या आप असोमिआ संस्कृति के इन चरित्रों को अनुभव करना चाहते है ?

अगर आप चाहते है तो ये लेख आपके लिए काफी सहायक होगा, क्योकि इस लेख में हम इस सुन्दर राज्य के संस्कृति को ही बिचार करेंगे। 

लकिन भाषा (Bhasha) ,खान-पान (Khan -Paan),निर्त्य-गीत (Nritya-Geet)या असम का पहनावा (Assam Ka Pehnawa) इन सभी विषयो को जानने से पहले जान लेते है इस राज्य के सांस्कृतिक स्रोत के बारे में।

असम की संस्कृति के स्रोत (Assam ki Sanskriti srot)

दुनिआ में हर एक चीज जो है;  उसका कही न कही आरम्भ या फिर जनम होता है।

किसी देश या समाज की संस्कृति भी कही पर जनम होती है और उसके बाद ही धीरे धीरे उसकी बिकाश होती है।

अगर हम असम राज्य की सांस्कृतिक स्रोत की बात करे तो इस राज्य की संस्कृति का जनम हुआ बहुत सारे सांस्कृतिक सम्मलेन के दुवारा; जैसे की Mongolian, Austro-Asiatic,Indo-Aryan इत्यादि।

बहुत सारे सांस्कृतिक बिश्लेषको के मुताबित असम का बिहू Austro-Asiatic संस्कृति का ही एक भाग था। लकिन बिहू में Austro-Asiatic उपादानों के अलावा Mongolian उपादान भी आज देखने को मिलते है।

इसी तरह इस जगह में बहुत पहले यानि Indo-Aryan के आने से पहले लोग हिन्दू धर्म का वहन नहीं करते थे। इसके बिपरीत यहाँ के लोग उस समय नद -नदी, पेड़-पौधे, साप, पक्षी ,पत्थर इन सबकी पूजा करते थे।

लकिन Indo-Aryan लोगो के आने के बाद, इन लोगो के बिच धीरे धीरे हिन्दू धर्म का बिस्तार होने लगे तथा समय के साथ साथ यहां का ज्यादातर लोग हिन्दू धर्म में दीक्षित होने लगे।

भाषा ज्ञानी भी बोलते है की असम राज्य के मूल भाषा असोमिआ भी Indo-Aryan भाषा का ही एक अंश है, जिसके कारण असोमिआ भाषा,हिंदी ,बंगाली ,गुजराती ,बिहारी इत्यादि भाषाओ से काफी मिलते जुलते है।

आज पूरा बिश्व बदल सुका है। पूरी दुनिआ एक दूसरे के साथ जुड़ सुकि है। जिसके कारण किसी भी संस्कृति के लिए अकेले रहना आशम्भव सा हो गया है।

दुनिआ में आये इस बृहद परिवर्तन के कारण जो जो शक्तिशाली संस्कृति है वो दुर्बल और छोटे छोटे संकृतिओ की हत्या करती जा रही है।

जैसे पश्चिमी संस्कृति आज परंपरागत भारतीय संस्कृति के ऊपर भारी पर रही है। 

ये उसी की भाटी है जिसकी भाटी एक चील छोटे छोटे पक्षिओ का शिकार करता है। आज असमिआ संस्कृति भी बहुत ज्यादा शक्तिशाली नहीं है, इसके कारन आज इसके उपादानों का तात्पर्य  अपने ही लोगो के बिच गायब होता जा रहा है।

असोमिआ जाती के “दिल का टुकड़ा” स्वरुप बिहू को अगर आप अध्ययन करोगे तो आपको इसमें पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव साफ साफ देखने को मिलता है।

एक उदाहरण के रूप में -जैसे की परंपरागत बिहू गानो में व्यबहार की गयी Song Instrument-की जगह आज Guitar ,Drums और Mandolin इत्यादि ले रही है।

 

असम की सांस्कृतिक पहनावा (Assam ka Pehnawa)

लोगो के कपड़े पहनने के तरीके से भी उनके संस्कृति का परिचय मिलता है।

अगर हम असम की सांस्कृतिक पहनावे (Assam ka Pehnawa) की बात करे तो देखा जाता है की यहा का मूल पहनावा है औरतो के लिए Mekhla Chadar और आदमीओ के लिए Dhoti -Kurta. इसके अलावा गमछा असम की सांस्कृतिक पहनावे के प्रतिक स्वोरुप है।

असम के Sualkuchi में बनायीं गयी Silk पूरी दुनिआ में इस राज्य का परिचय वहन करते है।

 

खाने-पीने के मामले में असम की संस्कृति (Assam ka khana – Peena)

खाने-पीने के मामले में असम का मूल खाद्य है चावल। यहा का किसान चावल की खेती बहुत ही बृहद परिमाण में करते है।

Ranjeet, Aijungh, Bora, Joha- इत्यादि जात के चावल यहा पर भारी मात्रा में उद्पादन किए जाते है।

बिविन्न समय पर पालन किए जाने वाले उच्चबो में बिविन्न तरीके के खाद्य यहा के लोग खाते है। जैसे की Pig meat, Amloi Tup (Red Ant Larwa), Rice bear इत्यादि। 

अगर आप असम से नहीं हो तो एक बार इस जगह को भ्रमण करके इन सारे सांस्कृतिक उपादानों स्वाद जरूर लेना, हमें पूरा बिस्वास है की आपको बहुत ही अच्छा लगेगा। 

ये लेख आपको कैसा लगा हमें निचे टिप्पणी करके जरूर बताना। 

धन्यवाद। 

 

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