असम के काटी बिहू (Kati Bihu of Assam)

 

असम और असोमिआ लोगो का पहचान पुरे भारत में सिर्फ दो ही मुख्य कारणो से है; यहाँ एक कारण है असोमिआ भाषा और दूसरा है असम का बिहू।

आप लोगो को सायद मालूम होगा की बिहू असम राज्य तथा असोमिआ जाती के लोगो का त्यौहार है। जिसको कुछ कुछ सांस्कृतिक बिश्लेषक इस जाती के लोगो कादिल का टुकड़ा” भी बोलते है।

दोस्तों क्या आप जानते है की इस त्यौहार को असम राज्य में तीन भागो में बाटा तथा पालन किआ जाता है। इन तीनो भागो को Rongali ,Kati और Magh Bihu के नाम से जाना जाता है।

दोस्तों आज हम इस लेख में असम के काटी बिहू (Kati Bihu of Assam) के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातो को जानेंगे।

जैसे की Kati Bihu क्या है और क्यों पालन किआ जाता है ? समाज में इसका प्रभाव क्या है ? इत्यादि इत्यादि। तो चलिए बिना देर किए इसको आरम्भ करते है।

असम के काटी बिहू (Kati Bihu of Assam)

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असम के काटी बिहू क्या है और क्यों पालन किआ जाता है ? (What is Kati Bihu and why it is celebrated in Assam?)

आपको हमने ऊपर ही बताया है की Kati Bihu असम राज्य में पालन की जाने वाली तीन बिहुओ के एक का नाम है।

हम ये तो जानते है की पुरे विश्व जो जो भी त्यौहार पालन किआ जाता है उनका उद्देश कृषि और प्रजनन से ही जुड़ा हुआ होता है।

दोस्तों ये काटी बिहू त्यौहार भी इन चरित्रों से भिन्न नहीं है। ये भी खेती से ही जुड़ा हुआ एक त्यौहार है, जिसको खेती की उन्नति के लिए हर साल मनाया जाता है।

ये एक बहुत ही सुन्दर प्रक्रिआ है जिस प्रक्रिआ से हर साल असम में बिहू पालन किआ जाता है।

जरा गौर कीजिएगा, पहले मनाया जाता है Rongali Bihu- इस त्यौहार के समय पूरी पृथ्वी प्रजनन के लिए उर्बरा हो जाती है अर्थात असम के लोग इस त्यौहार को पालन करके खेती तथा प्रजनन के लिए तैयार होने का सम्बाद प्रदान करते है।

रोंगाली बिहू के समय अनाज की उद्पादन के लिए बीज बोया जाता लकिन अनाज की उद्पादन होने में 6 महीने समय और लगते है।

जिसके कारण रोंगाली बिहू के बाद धीरे धीरे अनाज के गोदामों में अनाज कम होने लगते है, लोगो को खाद्य का अभाव होने लगता है और इसीलिए इस समय पालन किआ जाता है Kati Bihu. बहुत सारे लोग इसी कारण काटी बिहू को Kongali Bihu- भी बोलते है।

Kongali का अर्थ है कंगाल यानि गरीबी। इस त्यौहार के समय असम के लोग लक्ष्मी को पूजते है ताकि खेत से अधिक उद्पाद हो।

धीरे धीरे समय बीतता जाता है और तीन महीने बाद खेतो में अनाजों का भरमार हो जाता है, जिसके वजह से पुनः पालन किआ जाता है Magh Bihu. माघ बिहू को भोगाली बिहू भी बोला जाता है।

भोगाली का अर्थ है भोग करने का उच्चब। खेत में अनाजों का भरमार लगने के कारण माघ महीने में इस त्यौहार को जोरो-चोरो से इस राज्य पर पालन किआ जाता है।

असम में हर साल असोमिआ Kati-महीने में इस त्यौहार का पालन किआ जाता है अगर अंग्रेजी महीने की बात करे तो ये September-महीने में पड़ता है।

 

असम के काटी बिहू का समाज पर प्रभाव (Impact of Kati Bihu in Assamese Society)

जितने भी बड़े बड़े त्यौहार समाज में पालन किआ जाता है उन सभी का उस समाज के लोगो के ऊपर प्रभाव होता है। इसका भी प्रभाव समाज में पड़ता है और वो प्रभाव कुछ इस तरीके के है :-

1. असोमिआ समाज में ये त्यौहार एकता की बंधन को बहुत ही ज्यादा मजबूत करते है।

क्योकि अनाज के गोदाम में जब अनाज कम होने लगते है उसी समय इस त्यौहार का पालन किआ जाता है और इस समय लोग बच्चे से बड़े हर एक दूसरे के घर में जाकर आशिर्बाद करते है की उनका खेती अच्छा हो।

2. बिहू त्यौहार ही अधयात्मिक्ता पर प्रतिष्ठित है। इस समय हर बच्चे बड़ो को सम्मान करते है आदर करते है। इसके जरिए समाज में संतुलन हमेशा ही बना रहता है।

इस त्यौहार का असोमिआ समाज पर ये एक बहुत ही बड़ा योगदान माना जा सकता है।

 

असम के काटी बिहू का मूल चरित्र (Major charactersticks of Assam’s Kati Bihu)

1. हर साल अंग्रेजी सितम्बर और असोमिआ काटी महीने में पालन किआ जाता है।

2 .ये त्यौहार दिन को नहीं बल्कि रात को पालन किआ जाता है। दिन में घर के लोग खेतो को देखने जाते है और रात को तुलसी पूजा करते है तथा खेतो में आकाश बनती प्रज्वलन करते है।

3 . ये उछब खेती में उद्पाद की बृद्धि के लिए ही पालन किआ जाता है। 

 

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