असम आंदोलन (Assam Movement)

आधुनिक असम में आज तक हुए सभी आंदोलनो में से जो सबसे ज्यादा शक्तिशाली रहे उसी को इस राज्य के राजनैतिक इतिहास में असम आंदोलन कहाँ जाता है।

ये शक्तिशाली प्रतिबाद केबल इस राज्य का ही नहीं बल्कि पुरे भारत तथा बिस्व का, एक ऐसा उदहारण था जिसने दुनिआ के बिविन्न कोने को हिला के रख दिआ।

आज हम इसी शक्तिशाली आंदोलन की कहानी पढ़ेंगे, जिसको लिखा गया था 885 जन जवान शहीदों की कच्चे लहुओ के लाल रंग से।

तो चलिए कहानी आरम्भ करते है।

ये कहानी सुरु हुई थी सं 1971 में, जब भारत और पाकिस्तान के बिच घमासान यूद्ध हो रही थी। उस यूद्ध के दौरान पाकिस्तानी सैनिक बंगलादेश पर घुसके यहाँ के साधारण नागरिको को अत्याचार तथा हत्या कर रहे थे।

इसी कारणवर्ष बंगलादेश के ये साधारण नागरिक उपायहीन होकर असम तथा अन्य उत्तर-पूर्बी राज्य जैसे की त्रिपुरा की ओर जाने लगे।

1971 के 3 December से आरम्भ होने वाले ये यूद्ध 13 दिनों तक चले और आखिरकार 16 December को पाकिस्तान के पराजय के साथ ये यूद्ध भी समाप्त हो गया।

लकिन अब नया समस्या आके खड़ा हुआ था, ये समस्या ना पाकिस्तान का था और ना ही बंगलादेश के का। ये समस्या था भारत के असम राज्य का। क्योकि जो जो बंगलादेशी नागरिक उपायहीन होकर शरणार्थी के रूप में यहाँ आये थे, वो अब बापस लौट जाने की वजाय यही पर रहने लगे।

यही पर आपको एक बात बता देना चाहता हूँ की बंगलादेश के इन साधारण नागरिको की अर्थ-सामाजिक अवस्था बहुत ही ख़राब है। जिसके कारण वो लोग हमेशा ही निम्न मान का जीबन-यापन करते आ रहे है।

असम में शरणार्थी के रूप में आये इन बंगलादेशी नागरिको को इस राज्य में ज्यादा सुबिधा देखने लगा। यही वो कारन है जिसके वजह से वे लोग लौट जाने की वजाय असम में ही रहने लगे।

इसी तरह 1971 से समय तथा साल बीतता गया लकिन जो जो शरणार्थी यहा आये थे वो तो यहाँ से लौटकर बंगलादेश बापस नहीं गए बल्कि और भी लोग अब वहाँ से असम की ओर आने लगे।

यही पर इस शक्तिशाली प्रतिबाद की कहानी का आरम्भ होता है…………..

असम आंदोलन (Assam Movement)

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AASU का जनम (Birth of AASU): – जब हम असम आंदोलन की बात कर ही रहे है तो ऐसा कैसे हो सकता है की इस आंदोलन का मूल नायक AASU पीछे ही रह जाये। तो चलिए AASU का जनम भी थोड़ा सा जान लेते है।

AASU (All Assam Students Union) का सबसे पहले आरम्भ हुआ था सं 1940 को। उस समय इसको एक अलग नाम Asom Chattra Sanmilani के नाम से जाना जाता था। लकिन बाद में Asom Chattra Sanmilani का पतन हो गया और टुकड़ो में बटके एक हो गया All Assam Student Federation और दूसरा हो गया All Assam Students’ Congress.

लकिन सं 1967 में ये दोनों संघठन फिर से एक जुट हो गए और इस बार एक नए नाम से प्रकशित हुए, जो थे AASU. उसी सं के अगस्त महीने में इस छात्र संगठन ने अपना खुदका संबिधान भी प्रस्तुत किआ। जिसको हर एक AASU के सदस्य आज भी बड़े सम्मान के साथ पालन करते है।

अब आते है हमारे मूल मुद्दे पर……….

 

असम आंदोलन का तत्कालीन कारन (Immidiate Causes of Assam Movement)

भारत और पाकिस्तान के बिच 1971 में हुए यूद्ध के कारण असम में जो बांग्लादेशी नागरिको का प्रवजन आरम्भ हुआ वो कभी रुका नहीं बल्कि चलता ही गया। फिर सं आये 1978. यही वो सं था जिसमें इस आंदोलन का भ्रण विकशित हुआ।

1978 में Mangaldoi लोक सभा सीट के सांसद Hiralal Patwari जी का निधन हो गया था। इस निधन के बाद Mangaldoi लोक सभा सीट के लिए पुनर सुनाव अनुस्थित करना जरूरी हो गया।

सुनाव अनुस्थित करने के लिए सुनाव आयोग ने इच्छुक प्रार्थीओ से मनोनयन पत्र का अहबाहन किआ। लकिन AASU को ये संदेह था की वहाँ के जो ज्यादातर लोग थे यानी Voter, वे ज्यादातर बंगलादेशी है।

इसी कारन AASU ने सुनाव को रोकने की मांग की, ताकि बिदेशी लोगो के नाम भोटर लिस्ट से हटाया जाये। 27 November 1979 को पुरे असम राज्य में ASSU और इसकी राजनैतिक संगठन AAGSP (1985 के बाद में AGP) ने बंध तथा हरताल की घोसना कर दिआ।

जिन लोगो ने असम आंदोलन के बारे में थोड़ा सा भी पढ़ा है उनको सायद मालूम होगा की Khargeswar Talukdar कौन है ?

दराचल Khargeswar Talukdar बारपेटा जिल्ला में AASU के साधारण संपादक थे। Khargeswar Talukdar और उनके प्रतिबादी साथी बारपेटा में प्रतिबाद कर रहे थे। लकिन वही पर उन प्रतिबादकारिओ के ऊपर पुलिस ने आक्रमण करना सुरु कर दिआ।

IGP K.P.S. Gil- एक आईपीएस अफसर, उन्होंने Khargeswar Talukdar को बहुत ही बेरहमी से मारा और तब तक मारता रहा जब तक उनकी प्राण ना चली गयी हो।

असम आंदोलन (Assam Movement)

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Khargeswar Talukdar उन 885 जन जवान शहीदों में सबसे पहला जन है जिसके मृत्यु से इस लाल इतिहास का पहला पन्ना लिखा गया। इसी कारन Khargeswar Talukdar को असम आंदोलन के पहले शहीद के रूप में आज भी याद किआ जाता है।

उनके मृत्यु के बाद पुरे ब्रह्मपुत्र घाटी पर यूद्ध सा परिबेश सा गया। 1983 में भारत के प्रधान मंत्री इंदिरा गाँधी ने जब ये घोसना किआ की बंगलादेशी प्रवजन कारिओ को भी भोत देने दिआ जाएगा तब परिस्थिति और भी ख़राब हो गयी।

उसी सं के 18 February को कुछ असामिआ लोगो ने 2191 संदेहयुक्त बंगलादेशी लोगो की हत्या कर दी। उस घटना को आज भी असम आंदोलन के लाल इतिहास में Nellie Massacre नाम से जाना जाता है।

इसी तरह ये आंदोलन 1985 तक चला जिसमे बहुत सारे अबैध बिदेशी बंगलादेशी लोगो की हत्या हो गयी, बहुत सारे भाग भी गए और 885 असोमिआ प्रतिबादकारी व्यक्ति शहीद भी हुए।

इस आंदोलन को ख़तम करने के लिए 1985 के 15 अगस्त को भारत सरकार और AASU के बिच एक समझौता हुआ। इसी समझौते को ऐतिहासिक असम चुक्ति कहा जाता है। उस समय केंद्र में राजीब गाँधी के नेतृत्व में कांग्रेस दल की सरकार थी।

फिर उसी सं में बिधानसभा का निर्वाचन भी अनुस्थित हुआ और इस चुनाव में AASU के राजनैतिक संगठन AAGSP से बने AGP को बहुमत प्राप्त हुआ। AGP यानि Assam Gana Parishad दल के सभापति प्रफुल्ल कुमार महंत इस सरकार के मुख्य मंत्री बने।

और इसी तरह AGP सरकार तथा असम चुक्ति के साथ ही इस ऐतिहासिक आंदोलन का समाप्त किआ गया।

 

निष्कर्ष (Conclusion)

ये कोई नहीं जानता की आगे क्या होगा लकिन आज यहाँ फिर से एक ऐसा परिस्थिति लौट आया है।

जबसे केंद्र सरकार ने नागरिक बिल को महत्व देना सुरु किआ है तब से असम में ऐसा परिस्थिति विराज कर रहा है।

क्या ये राज्य फिर से एक और हिंसात्मक आंदोलन की तरफ जा रहा है ? क्या असम में असम आंदोलन 2.0 सुरु होने वाला है ?

आप क्या सोचते है हमें निचे टिप्पणी करके जरूर ज्ञात कीजिएगा।

 

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